जालंधर। सजिर्कल स्‍ट्राइक के हीरो नार्दर्न कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। मगर, उनके पिता मनमोहन सिंह के कारनामों को सुनेंगे, तो आपका भी सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा। उन्होंने सिर्फ सरहदों पर ही देश सेवा नहीं की, बल्कि रिटायरमेंट के बाद भी ऐसे काम किए कि सरकार को 19 बार उन्हें एक्सटेंशन देने के लिए मजबूर होना पड़ा।

86 साल के मनमोहन ने बतौर जिला सैनिक कल्याण अधिकारी अब तक हजारों युवा लड़के-लड़कियों को सेना, अर्धसैनिक बल, एयरफोर्स, नेवी, बीएसएफ और पंजाब पुलिस तक में कांस्टेबल से लेकर अधिकारी तक में भर्ती के लिए तैयार किया। देश सेवा का ऐसा जुनून की दस साल महज एक रुपए वेतन पर काम किया। लेफ्टिनेंट कर्नल मनमोहन सिंह सेना से रिटायर होने के बाद 1987 में जालंधर में जिला सैनिक कल्याण अधिकारी नियुक्त हुए।

आमतौर पर एक वर्ष के कार्यकाल के बाद इस पद पर किसी दूसरे अधिकारी को नियुक्त किया जाता है। मगर, मनमोहन की कार्यशैली और उत्साह को देखकर पंजाब सरकार ने उन्हें रिकॉर्ड 19 बार इस पद पर एक्सटेंशन दी। वह वर्ष 2013 तक इस पद पर रहे और इन 26 वर्षों के दौरान उन्होंने प्री रिक्रूटमेंट ट्रेनिंग कैडर चलाए, जिनमें दाखिला लेने के लिए पंजाब एवं पड़ोसी राज्यों के युवाओं की कतारें लगती थीं।

यह उनका अद्भूत जुनून है कि सेना से रिटायर होने के बाद भी उन्‍होंने 55 हजार युवाओं (लड़के-लड़कियों) को सशस्त्र सेनाओं में भर्ती होने के लिए प्रशिक्षित किया है। सेना में लड़कियों की ऑफिसर के रूप में एंट्री शुरू हुई, तो उन्होंने लड़कियों के लिए विशेष कैडर की शुरुआत की। उनसे ट्रेनिंग लेकर कई लड़कियां ऑफिसर बनीं। बीएसएफ ने देश भर में पहली महिला बटालियन स्थापित की तो उसमें भर्ती होने वाली 130 लड़कियां ऐसी थीं, जिन्होंने मनमोहन सिंह से ट्रेनिंग ली थी।

26 वर्ष से गणतंत्र दिवस व स्वतंत्रता दिवस समारोह की करवा रहे तैयारी

विगत 26 वर्ष से जालंधर में गणतंत्र दिवस एवं स्वतंत्रता दिवस (परेड एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम) की तैयारी मनमोहन सिंह की ही देखरेख में होती है। एक बार फिर से वह गुरु गोबिंद सिंह स्टेडियम में होने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियों में जुटे हुए हैं। वह कहते हैं कि देश ने हमको बहुत कुछ दिया है। मैं आखिरी दम तक देश की सेवा करना चाहता हूं। युवाओं में भी ऐसा ही जज्‍बा देखना चाहता हूं।