नई दिल्ली। लोकसभा में सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के लिए कांग्रेस पर तंज कसते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि वह इसके लिए पार्टी को धन्यवाद देते हैं क्योंकि इस वजह से उन्हें विपक्ष के खोखलेपन को उजागर करने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि विपक्ष बिना तैयारी के यह प्रस्ताव लेकर आया था।

प्रधानमंत्री संसद के मानसून सत्र के दौरान भाजपा संसदीय दल की पहली बैठक को संबोधित कर रहे थे। खास बात यह है कि लंबे समय बाद भाजपा संसदीय दल की बैठक में मंच पर इस बार सात कुर्सियां लगाई गईं। इन पर प्रधानमंत्री मोदी, पार्टी अध्यक्ष अमित शाह, वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी और अनंत कुमार बैठे थे। अब तक सभी नेता नीचे बैठते थे और जिस नेता को बोलना होता था, वह मंच पर जाता था।

बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने पत्रकारों को बताया कि पहले केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भाषण दिया और इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि विपक्ष की ओर से लाया गया अविश्वास प्रस्ताव उनकी राजनीतिक अपरिपक्वता और उनकी नासमझी को प्रदर्शित करता है। उन्होंने बताया कि अविश्वास प्रस्ताव पर मिली प्रचंड जीत पर प्रधानमंत्री को बधाई दी गई। इस पर मोदी ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव पर मिली जीत का श्रेय भाजपा और उसके सहयोगी दलों के सभी सदस्यों को दिया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने प्रस्ताव पर गृह मंत्री राजनाथ सिंह के भाषण की तारीफ की और कहा कि पार्टी सदस्यों को इसे लोगों तक लेकर जाना चाहिए। मोदी ने बताया कि युगांडा यात्रा के दौरान वहां के सांसदों ने भी अविश्वास प्रस्ताव पर हुई बहस का जिक्र किया। अनंत कुमार ने बताया, जिस तरह भारत में सत्ताधारी दल ने सरकार का पक्ष रखा और प्रधानमंत्री ने जवाब दिया वह तारीफ के काबिल था।

पार्टी सूत्रों ने बताया कि बैठक में नितिन गडकरी ने कहा कि विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर भ्रम फैला रहा है। वहीं, अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव तब लाया जाता है जब सरकार बहुमत खो चुकी हो या देश में अशांति की स्थिति हो। फिलहाल यह प्रस्ताव लाने का कोई कारण नहीं था, जिसका 326 सदस्यों ने विरोध किया और सिर्फ 126 सदस्यों ने समर्थन। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भी इस बड़े अंतर को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा।