नई दिल्ली। गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रही जेट एयरवेज की उड़ाने पूरी तरह से बंद हो चुकी हैं। महीनों से हजारों कर्मचारियों को सैलेरी नहीं मिली हैं, वहीं इस मामले में सरकार भी अब तक कोई रास्ता नहीं निकाल सकी है। इसी बीच सरकारी बैंकों के कई एसोसिएशन बेरोजगार हुए कर्मचारियों के पक्ष में उतर गए हैं। बैंक कर्मचारियों के सबसे बड़े यूनियन ऑल इंडिया बैंक इंप्लॉईज एसोसिएशन (AIBEA) ने कर्जदाता बैंकों से कहा है कि वे जेट एयरवेज को कर्मचारियों के बकाया सैलरी भुगतान के बराबर का कर्ज मुहैया करा दें।

AIBEA के महासचिव सीएच वेंकटचलम ने कहा कि यह कर्ज कर्मचारियों के पीएफ या ग्रेच्युटी में जमा राशि के हिसाब से दिया जा सकता है। वहीं, कई बैंक संगठनों ने इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) को भी इस बारे में पत्र लिखा है। इसमें संगठनों ने सलाह दी है कि सैलरी भुगतान अटकने की वजह से कर्मचारियों के समक्ष जो संकट है, उससे उन्हें निकालने के लिए विशेष कर्ज मुहैया कराया जाए।

वेंकटचलम ने कहा, 'जेट को और वित्तीय मदद नहीं देने का कंसोर्टियम का फैसला सही है। लेकिन कर्जदाता बैंक जेट एयरवेज को सिर्फ कर्मचारियों का बकाया भुगतान करने के लिए तो कर्ज दे सकते हैं। चाहें तो वे इस विशेष प्रावधान के साथ कर्ज दें कि कंपनी इस राशि का उपयोग किसी और मद में नहीं करेगी।'

उन्होंने कहा कि अगर एयरलाइन को नया निवेशक मिल जाता है और वह सभी कर्मचारियों को वापस नौकरी पर रख लेता है, तो इस रकम की उससे वसूली की जा सकती है। अगर कंपनी को कोई खरीदार नहीं मिलता है, तो कंपनी को कर्मचारियों के अंतिम सैटलमेंट से पहले बैंकों का बकाया भुगतान करना चाहिए।