जम्मू : करतारपुर कॉरिडोर के बाद अब सेव शारदा कमेटी कश्मीर ने शारदा पीठ जाने के लिए मार्ग खोलने की मांग तेज कर दी है। हालांकि यह कमेटी 2005 से संघर्ष करती आ रही है, लेकिन करतारपुर कॉरिडोर बनने के बाद अब उन्हें उम्मीद बंधी है कि यह मार्ग भी खोल दिया जाएगा। गुरुवार को जम्मू में सेव शारदा कमेटी के संस्थापक रविंद्र पंडिता ने कहा कि शारदा पीठ सनातन धर्म की 18 प्रमुख पीठ में से एक है।

महाराजा रणबीर सिह के समय में शारदा पीठ यात्रा को बहुत बढ़ावा मिला था। स्वामी नंद लाल इस पीठ में बैठने वाले अंतिम संत थे। उन्होंने कहा कि हाल ही में भारत और पाकिस्तान की सरकारों ने करतारपुर कॉरिडोर खोलने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। दोनों ही देशों को शारदापीठ पर भी ऐसा ही फैसला लेने की जरूरत है ताकि शंकराचार्य को मानने वाले और कश्मीर और देश के विभिन्न भागों में रहने वाले हिदू इस पीठ में जाकर माथा टेक सकें।

शारदापीठ गुलाम कश्मीर के नीलम जिले में स्थित है। उन्होंने कहा कि कमेटी बनाने के बाद से ही वे ननकाना साहिब यात्रा की तर्ज पर नियंत्रण रेखा समझौते की समीक्षा कर जम्मू कश्मीर के हिदुओं को इस पीठ में जाने की इजाजत देने की मांग करते आ रहे हैं। पंडिता ने कहा कि यह हमारा हक है कि हम माता शारदा के मंदिर में जाएं। उनकी कमेटी दोनों देशों के लिए काम कर रही है। पंडिता ने कहा कि वर्ष 2005 के बाद से वे अब तक कई राजनेताओं और अधिकारियों से मिल चुके हैं।

गुलाम कश्मीर की सिविल सोसायटी से भी उन्होंने संपर्क साधा था। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर बर्लिन की दीवार गिर सकती है तो गुरु नानक देव जी के आशीर्वाद से करतापुर कॉरिडोर के बहाने दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संबंध भी बेहतर हो सकते हैं।