भुवनेश्वर। पुरी स्थित श्रीजगन्नाथ मंदिर के भीतरी रत्न भंडार की चाबी पर रहस्य का पर्दा बरकरार है। डुप्लीकेट चाबी मिली भी तो रिकॉर्ड रूम में जबकि होनी चाहिए थी जिला कोषागार में।

चाबी प्रकरण पर एक चश्मदीद गवाह सामने आए हैं जिनके सामने चाबी को सील करके तत्कालीन अपर जिलाधिकारी को सौंपा गया था।

श्रीमंदिर के पूर्व प्रशासक रवींद्र मिश्रा ने दावा किया है कि रिकॉर्ड रूम में पाई गई चाबी ही असली है। फालतू के सवाल उठाए जा रहे हैं। 1985 में आखिरी बार भीतरी रत्नभंडार खोला गया था, तब वह ही प्रशासक थे।

उनका कहना है कि कोई डुप्लीकेट चाबी नहीं है। कुछ मरम्मत कार्य के लिए उन्होंने खुद भीतरी रत्नभंडार खोला था। ताला पर सील लगाकर चाबी को भी लिफाफा में सील करके कोषागार में उनकी निगरानी में रखवाया गया था।

अब वहां से रिकॉर्ड रूम तक चाबी कैसे पहुंची, मालूम नहीं। उल्लेखनीय है कि श्रीमंदिर के रत्न भंडार की चाबी गायब होने का मामला सामने आने के बाद से ही इसे लेकर बवाल मचा हुआ है।

ओडिशा सरकार ने मामले की न्यायिक जांच का निर्देश देते हुए आयोग का गठन कर अगस्त तक रिपोर्ट सौंपने को कहा है।


न्यायिक जांच आयोग अपना काम करेगा। निर्धारित अवधि में रिपोर्ट आने पर ही कुछ कहा जा सकेगा।

-प्रताप जेना, कानून मंत्री, ओडिशा।