हालही में एक आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र में देश की सबसे बड़ी बैंक स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के पास उसके ग्राहकों से हुए फ्रॉड के केसेस में अब तक 7951 करोड़ रूपए के मामले सामने आये हैं। ऐसे में बैंक के साथ ही ग्राहको की खुद की जिम्मेदारी बनती है कि, सावधानी पूर्वक ऑनलाइन बैंकिंग का इस्तेमाल करें।

फ्रॉड के ये 10 तरीके बिलकुल कॉमन:

1- आपके बंद क्रेडिट-डेबिट कार्ड को चालु करने के बहाने आपसे व्यक्तिगत जानकारी लेना और फ्रॉड करना।

2- बैंक कर्मी बताकर फ्रॉड करने वाले आपको फ़ोन करेंगे और आपसे आपकी बैंक से जुडी कुछ जानकारी लेकर आपके पैसे उड़ा देते हैं।

3- एकनप्रोफेशनल आवाज में ये आपको लैंडलाइन या किसी मोबाइल से फ़ोन करेंगे और मोबाइल, नाम, नंबर और जन्म तिथि लेकर आपके पैसे चोरी कर लेते हैं।

4-फ़ोन कर ऐसे कॉलर आपको डरते हैं कि आपने ऐसा नहीं किया तो आपके पैसे काट जाएंगे आदि।

5-बेटर इंसेंटिव का लालच देकर आपसे कार्ड अपग्रेड करवाने के नाम पर आपसे जानकारी लेते हैं।

6-किसी भी तरह की otp की याणकारी लेकर आपसे ये पैसे ऐंठ सकते हैं।

7- आपके ऑनलाइन अकाउंट को हाईजैक कर ये ठगी कर सकते हैं।

8- ऐसे तरीकों से फ्रॉडर पैसे रिमोट एरिया के अकाउंट में ट्रान्सफर करते हैं जो पुलिस के लिए ढूढना मुश्किल होता है।

9- बैंक के कर्मचारी कभी भी आपसे आपके बैंक डिटेल्स नहीं मांगते। अगर ऐसा होता है तो कुछ गड़बड़ है। इसलिए इसकी सुचना तत्काल बैंक और पुलिस को दें।

10- कॉल आमतौर पर एक लैंडलाइन नंबर से ही आते हैं। हालांकि, कभी-कभी ये एक मोबाइल नंबर भी हो सकता है।

11- किसी भी तरह की समस्या होने पर वे आपसे निकटतम बैंक शाखा का दौरा करने के लिए कहेंगे।

12-अपने बैंकिंग का विवरण जैसे कार्ड नंबर, लॉगिन-आईडी, सीवीवी या एटीएम पिन को किसी भी कारण से किसी को भी न बताएं।

बताते चलें कि, पिछले साल एसबीआई ने धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों को देखते हुए कुछ कार्डों पर दैनिक निकासी की सीमा को घटाकर 20,000 रुपये कर दी थी। वहीं, इस साल की शुरुआत में बैंक ने चिप-आधारित डेबिट और क्रेडिट कार्ड अनिवार्य कर दिए हैं। बैंक के अनुसार चिप-आधारित कार्ड में धोखाधड़ी का खतरा कम रहता है।