नई दिल्ली। मतगणना के दौरान वोटिंग का रुझान सार्वजनिक होने से रोकने के लिए टोटलाइजर मशीन के इस्तेमाल पर फैसला लेने को केंद्र ने मंत्रियों की एक समिति बनाई है। गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय समिति को इस पर निर्णय लेकर केंद्रीय कैबिनेट को सिफारिश करनी है।

सरकार ने यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद उठाया है। 5 अगस्त को कोर्ट ने टोटलाइजर पर आठ हफ्ते में फैसला लेने का आदेश दिया। समिति में वित्त मंत्री अरुण जेटली, रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद को सदस्य बनाया गया है।

टोटलाइजर के इस्तेमाल को लेकर चुनाव आयोग ने 2008 में ही प्रस्ताव दिया था। तर्क दिया था कि इस मशीन से मतगणना के समय मतदान रुझान को सार्वजनिक होने से तो रोका ही जा सकता है। इससे मतदाताओं की गोपनीयता भी बरकरार रहेगी। चुनाव आयोग के इस प्रस्ताव को कानून मंत्रालय से भी हरी झंडी मिल चुकी है। उसने चुनाव सुधारों पर 10 मार्च, 2015 को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी रिपोर्ट में टोटलाइजर मशीन के इस्तेमाल की सिफारिश की है।

इसी क्रम में कानून मंत्रालय ने पीएमओ के भेजे अपने नोट में कहा है, "सुप्रीम कोर्ट में पिछले दो वर्षों से याचिका पर सुनवाई चल रही है। कोर्ट का सख्त निर्देश है कि इस बारे में जल्द से जल्द फैसला लिया जाए।" इसके बाद पीएमओ के निर्देश पर मंत्रियों की समिति बनाई गई।

समिति से कहा गया है कि वह टोटलाइजर मशीन का इस्तेमाल करने या नहीं करने पर अपनी रिपोर्ट केंद्रीय कैबिनेट को सौंपे। मौजूदा व्यवस्था में प्रत्येक मतदान केंद्र के वोटिंग का रुझान सार्वजनिक हो जाता है। इससे उक्त क्षेत्र के मतदाताओं के उत्पीड़न का खतरा बना रहता है।