त्रिची। एअर इंडिया एक्सप्रेस का एक विमान शुक्रवार की सुबह भीषण दुर्घटना का शिकार होते-होते बचा। टेक ऑफ के समय एयरपोर्ट की चारदीवारी से पहिया टकराने के बाद भी विमान के दोनों पायलट स्थिति से अनजान बने रहे।

त्रिची से दुबई के लिए निकला यह विमान क्षतिग्रस्त हालत में चार घंटे तक उड़ता रहा। बाद में रास्ता बदलते हुए इसे मुंबई में लैंड कराया गया। मामले की जांच तक दोनों पायलटों को रोस्टर से बाहर कर दिया गया है। इसका अर्थ है कि दोनों अभी उड़ान से दूर रहेंगे।

एअर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट आइएक्स-611 ने गुरुवार की रात डेढ़ बजे त्रिची से दुबई के लिए उड़ान भरी थी। उड़ान के कुछ देर बाद अधिकारियों ने पाया कि एयरपोर्ट की चारदीवारी पर लगा इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आइएलएस) टूट गया है। इससे अधिकारियों को टेक ऑफ के समय विमान का पहिया दीवार से टकराने का अंदेशा हुआ।

एयरपोर्ट के डायरेक्टर के. गुनाशेखरन ने बताया कि मामले का अंदेशा होते ही अधिकारियों ने एयर ट्रैफिक कंट्रोलर (एटीएस) को जानकारी। इसके बाद एटीएस ने विमान में सवार पायलटों से संपर्क किया। पायलटों ने विमान में सब कुछ सामान्य होने की बात कही, इसलिए उन्हें उड़ान जारी रखने की अनुमति दे दी गई। हालांकि बाद में विमानन कंपनी ने सुरक्षा की दृष्टि से फ्लाइट को मुंबई में लैंड कराने का फैसला किया।

फ्लाइट ने सुबह 5ः35 बजे मुंबई में लैंड किया। इसमें सवार 130 यात्री और क्रू के छह सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं। सभी यात्रियों को यहां से दूसरे विमान के जरिये दुबई रवाना कर दिया गया।

हो सकता था बड़ा हादसा-

टेक ऑफ के समय पहिया चारदीवारी से टकराने के कारण विमान को बड़ा नुकसान हुआ है। विमान के निचले भाग (अंडर बेली) का कुछ हिस्सा टूट गया है। कुछ दूर तक इसमें दरार आ गई है। विमान का वीएचएफ एंटीना भी क्षतिग्रस्त हो गया है। इस तरह की हालत में उड़ान जारी रखने से विमान बड़े हादसे का शिकार हो सकता था।

पायलटों को है पर्याप्त अनुभव-

विमान के पायलट इन कमांड कैप्टन डी. गणेश बाबू को बी737 विमान में 3,600 घंटे का उड़ान अनुभव है। उन्होंने करीब 500 घंटे कमांडर के तौर पर भी उड़ान भरी है। उनके अलावा फर्स्ट ऑफिसर कैप्टन अनुराग को करीब 3,000 घंटे का उड़ान अनुभव है।