नई दिल्ली। वित्त मंत्री अरुण जेटली के बजट भाषण में गरीबों पर सबसे ज्यादा जोर नजर आया। इसके लिए वित्त मंत्री ने खुद प्रधानमंत्री का उदाहरण दिया कि कैसे वो गरीबी में पलकर देश के शीर्ष पद तक पहुंचे। इसलिए वो गरीबों की स्थिति के बारे में अच्छे से जानते हैंं।

वित्त मंत्री ने कहा कि पीएम मोदी खुद गरीबों के लिए केस स्टडी हैं, इसलिए ये सरकार गरीबों और मध्यम वर्गों के लिए सबसे ज्यादा काम कर रही है।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपने बजट भाषण में बताया कि, 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' के तहत शुरू की गई सुकन्या समृद्धि स्कीम सफल रही। 2015 में इस स्कीम की शुरुआत की गई थी, इस स्कीम के तहत दो साल के भीतर ही देश में लड़कियों के नाम पर 1.26 करोड़ खाते खोले गए। जिसमें 19, 183 करोड़ रुपये जमा हुए।

अपने भाषण में वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि सरकार उज्‍जवला योजना के जरिए देश के गरीबों को नि:शुल्‍क गैस कनेक्‍शन दे रही है। सौभाग्‍य योजना के माध्‍यम से चार करोड़ घरों को बिजली कनेक्‍शन से जोड़ा जा रहा है। तीन हजार से ज्‍यादा जन औषधि केंद्रों में 800 से ज्‍यादा दवाइयां कम मूल्‍य पर बेची जा रही हैं। स्‍टैंट की कीमत नियंत्रित की गई है, वहीं गरीबों के लिए मुफ्त डायलिसिस की विशेष योजना शुरू की गई है।

वित्‍त मंत्री ने कहा कि गरीबों और मध्‍यम वर्ग को आवास योजनाओं में भी ब्‍याज दर में बड़ी राहत दी जा रही है। सरकारी सेवाएं चाहे बस या ट्रेन टिकट या सभी को ऑनलाइन प्रमाण-पत्र उपलब्‍ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। दो से तीन दिन के भीतर घर पर पासपोर्ट, एक दिन में कंपनी का रजिस्‍ट्रेशन जैसे लाभ देश में बड़े वर्ग को दिए जा रहे हैं।

उन्‍होंने कहा कि प्रमाण पत्रों को सत्‍यापित करने की बाध्‍यता खत्‍म कर दी और समूह ‘ग’ और ‘घ’ नौकरी में इंटरव्यू खत्म करने से लाखों नौजवानों को समय और पैसे की बचत हुई है। सरकार हर व्‍यक्ति को उपयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं महिलाओं की अस्मिता को लेकर भी सरकार काफी काम कर रही है। इसलिए वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में अगले वित्तीय वर्ष में दो करोड़ शौचालय बनाने का लक्ष्य रखा है। अब तक सरकार गांवों में 6 करोड़ शौचालय बना चुकी है। 2022 तक देश में हर गरीब का अपना घर हो, इसके लिए भी सरकार दिन-रात मेहनत कर रही है।

अगले वित्त वर्ष में 51 लाख नए मकान बनाए जाएंगे। वहीं गांवों में आधारभूत ढांचे को विकसित करने के लिए 2018-19 के बजट में सरकार ने 14 लाख करोड़ से ज्यादा का प्रावधान किया है।