लखनऊ। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि समेत किसानों से जुड़ी योजनाएं अधर में लटक सकती हैं। विभागीय अधिकारी कैडर विसंगति के विरोध में आंदोलन शुरू करने के मूड में हैं। उप्र अधिकारी महापरिषद प्रमुख सचिव कृषि, कृषि उत्पादन आयुक्त और मुख्य सचिव को अपनी मांग और मंशा बता चुका है।

दरअसल प्रांतीय कृषि सेवा के गु्रप बी के सभी वर्गों के अधिकारियों का चयन 'उप्र एग्रीकल्चर ग्रुप बी सर्विसेज' से होता है। कैडर निर्धारण की नियमावली में गु्रप बी से ए में तरक्की के लिए सम्मिलित की जगह हर वर्ग की अलग-अलग वरिष्ठता सूची तैयार किये जाने से यह विसंगति उत्पन्न हुई। इसके नाते जिस शाखा में गु्रप एक का पद खाली होता है, उसी के अधिकारी की पदोन्नति होती है।

बहुत पहले वरिष्ठता की एक ही सूची बनने से विसंगति नहीं उत्पन्न होती थी। 1992 में बनी नयी सेवा नियमावली के बाद इसकी शुरुआत हुई। तबसे इसे दूर करने की मांग भी होती रही। मामला ट्रिब्यूनल में भी जा चुका है। वहां से छह जून-2017 और 24 जनवरी 2019 को आये निर्णय में इसकी अलग-अलग व्याख्या की गयी। अगर जून-17 में आये आदेश के क्रम में डीपीसी हुई तो 1993-94 में ग्रुप बी की सेवा में आने वाले दस साल पहले के अधिकरियों से वरिष्ठ हो जाएंगे। 800 अधिकारियों में से 90 फीसद इससे प्रभावित होंगे।

शासन भी कर चुका है स्वीकार

विसंगति की बात मानते हुए शासन ने नवंबर-2014 में एक समिति भी गठित की थी। गु्रप के अधिकारियों का पक्ष भी लिया गया, पर हुआ कुछ नहीं। इसके नाते कुछ शाखाओं के ग्रुप बी के अधिकारी मात्र चार वर्ष की सेवा में ही तरक्की पा जाते हैं और कुछ को दो दशक बाद भी मौका नहीं मिलता।

महापरिषद के डॉ. सत्येंद्र कुमार सिंह ने कहा कि किसी के मौलिक अधिकार का हनन न हो। नैसर्गिक न्याय के अनुसार वरिष्ठता भी सेवा काल से ही तय होनी चाहिए। इस संबंध में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही का कहना है कि जो भी होगा, पहले के आदेश और न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होगा। किसी के साथ अन्याय नहीं होने देंगे।