श्री आनंदपुर साहिब। रूपनगर के श्री आनंदपुर साहिब में बनाया गया विरासत-ए-खालसा देश में सबसे ज्यादा देखा जाने वाला संग्रहालय बन गया है। इसका नाम 'लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' में दर्ज किया गया है। पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामलों के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने बताया कि सरकार पंजाब की विरासत और पंजाबियत को संभालने का हर संभव प्रयास कर रही है। यही कारण है कि आज पंजाब दुनियाभर के पर्यटकों की पहली पसंद बनता जा रहा है।

विश्वभर में विलक्षण पहचान बना चुका विश्व प्रसिद्ध विरासत-ए-खालसा अब देश में पहले नंबर पर आ गया है। सात वर्षों में यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या 97 लाख से भी ज्यादा हो चुकी है। लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स अपने फरवरी में आने वाले प्रकाशन में इसकी जानकारी भी छापेगा। सिद्धू ने इसके लिए अधिकारियों व स्टाफ को धन्यवाद भी दिया।

2011 में उद्घाटन

वर्ष 1998 में 22 नवंबर को पांच प्यारों के हाथों से विरासत-ए-खालसा की आधारशिला रखी गई थी। 14 अप्रैल 2006 बैसाखी वाले दिन इसकी इमारत का उद्घाटन हुआ। 25 नवंबर, 2011 को पहले फेस व इसकी गैलरियों का उद्घाटन सीएम प्रकाश सिंह बादल ने किया।

कई हस्तियां कर चुकी हैं दौरा

सबसे पहले कैप्टन पंजाब दौरे पर आए प्रिस चार्ल्स और कैमिला पार्कर को विरासत ए खालसा लेकर आए थे। तब दुनिया को इसके बारे में पता चला था। उसके बाद 2014 में कनाडा के प्रधानमंत्री स्टीफन हापर व मारिशस के राष्ट्रपति भी यहां आए। साल 2018 में 10 लाख 75 हजार पर्यटक पहुंचे संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के सचिव विकास प्रताप ने बताया कि साल 2011 से लेकर अब तक अब तक 97,03,510 पर्यटक विरासत-ए-खालसा देख चुके हैं।

वर्ष 2018 में 10 लाख 75 हजार पर्यटकों ने इसका दीदार किया। यह आंकड़ा पिछले पिछले पांच वर्षों में सबसे ज्यादा है। यह संग्रहालय पर्यटकों के लिए सुबह 10 बजे से शाम 4ः30 बजे तक खुला रहता है। मुख्य कार्यकारी अफसर मालविंदर सिंह जग्गी ने बताया कि यहां रोजाना औसतन 5262 पर्यटक आ रहे हैं।

खासियत

550 वर्षों की विरासत -विरासत-ए-खालसा में 27 गैलरियां हैं। इनमें पंजाब के समृद्ध व गौरवमयी 550 वर्षों की विरासत को पेश किया गया है।

-इनमें हस्तकला, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के साथ 3डी तकनीक समेत वीडियो कंटेंट से गौरवशाली इतिहास बताया जाता है।

-पंजाब के रहन-सहन के अलावा गुरु साहिबान व पंथक इतिहास के बारे में लोगों को जानकारी।

-पहले व दूसरे हिस्से में पंजाब की विरासत, गुरु साहिबान का जीवन, श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की स्थापना, बंदा सिंह बहादुर, मिसल काल, महाराजा रणजीत सिंह काल, एंग्लो-सिख युद्ध, धर्म युद्ध मोर्चे, पंजाब व देश की आजादी का संघर्ष, भारत-पाक बंटवारा व बंटवारे के बाद के सुनहरी इतिहास की जानकारी दी जाती है।

कैप्टन ने पांच बैंकों को बनाया था कस्टोडियन विरासत ए खालसा का कॉन्सेप्ट बेशक पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिह बादल का था, लेकिन इसे कैप्टन अमरिदर सिह ने मुकम्मल करवाया। साल 2002 में जब कैप्टन अमरिदर सिह मुख्यमंत्री बने थे, तब उन्होंने विरासत-ए-खालसा के निर्माण में आ रही फंडों की कमी का समाधान किया था।

कैप्टन ने पांच बैंकों यूनियन बैंक, सेंट्रल बैंक, केनरा, ओरिएंटल व पीएनबी को कस्टोडियन बनाकर 100 करोड़ रुपये लोन दिलाने का प्रबंध किया था। उस समय इसका निर्माण बंद हो गया था। फिर इसे साल 2005 में शुरू किया गया था।