चेन्नई। जहां एक तरफ देश में मानसून दस्तक दे चुका है वहीं इसकी वजह से अब तक लोगों को राहत सिर्फ गर्मी से मिल सकी है पानी की किल्लत से नहीं। यही कारण है कि तमिलनाडु में गंभीर जल संकट पैदा हो गया है। पिछले तीन साल से सूखे जैसी स्थिति, बढ़ते तापमान और मानसून में देरी की वजह से राज्य के प्रमुख जलाशय और कुएं सूख गए हैं, भूजल स्तर और गिर गया है और नलकूप फेल हो गए हैं। मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी का कहना है कि पेयजल की आपूर्ति करने के सभी संभव उपाय किए जा रहे हैं।

चेन्नई को पानी सप्लाई करने वाले चोलावरम और रेडहिल्स जलाशय सूख गए हैं, जबकि पूंडी जलाशय में नाम मात्र का पानी रह गया है। लोग सरकारी और निजी टैंकरों से सप्लाई किए जा रहे पानी को ही पीने को मजबूर हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने लोगों से सहयोग की अपील की है। उनका कहना है कि अगले चार-पांच महीने तक भूजल की ही सप्लाई की जाएगी। दूसरी तरफ खबर है कि पानी की कील्लत के चलते महिलाओं को टैंकर के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है वहीं एक टैंकर के लिए दोगुना रकम देनी पड़ती है। आलम यह है कि टैंकर से पानी लेने के लिए लोगों को टोकन जारी किए जा रहे हैं और टोकन होने पर ही पानी मिल रहा है।

नहरों की सफाई नहीं होने से हाई कोर्ट नाराज

मद्रास हाई कोर्ट ने जलाशयों से जुड़ी नहरों पर अतिक्रमण और उनकी सफाई नहीं कराने पर नाराजगी जताई। जस्टिस एस मणि कुमार और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ पालर नदी से वेल्लोर की उदयनड्रम झील को पानी सप्लाई करने वाली नहर की सफाई की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। नहर और नदी से गाद हटाने के लिए उठाए गए कदम की जानकारी भी मांगी है।