नई दिल्ली। सुंजवां कैंप पर हुए आतंकी हमले में सेना के 6 जवान शहीद हो गए। उनकी शहादत के बाद एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी को सेना ने करारा जवाब दिया है। ओवैसी ने कहा था कि सुंजवां में 5 कश्मीरी मुसलमानों ने बलिदान दिया है। इसके बाद सेना ने इसका करारा जवाब देते हुए कहा है कि शहीदों का कोई धर्म नहीं होता।

सुंजवां हमले को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कते हुए जीओसी नॉर्दर्न कमांड, लेफ्टिनेंट जनरल देवराज अनबू ने बुधवार को कहा कि हम शहीदों का सांप्रदायीकरण नहीं करते, जो इस तरह के बयान दे रहे हैं वो सेना को अच्छी तरह नहीं जानते।

उन्होंने आगे कहा कि दुश्मन फ्रस्ट्रेट है और सॉप्ट टार्गेट्स को निशाना बना रहा है, जब वो असफल रहते हैं तो वो कैंप्स पर हमला करते हैं। आतंकियों से युवाओं का जुड़ना चिंता का विषय है और हमें इस का समाधान ढूंढना होगा। 2017 में हमने इनके नेतृत्व को टार्गेट किया।

उन्होंने आतंकवाद के बढ़ावे में सोशल मीडिया की भूमिका पर बोलते हुए कहा कि इससे भी आतंक को काफी बढ़ावा मिल रहा है। बड़े पैमाने पर युवा सोशल मीडिया से जुड़े हैं और प्रभावित होते हैं। हमे लगता है कि इस मुद्दे पर भी ध्यान देना होगा।

लेफ्टिनेंट जनरल ने आगे कहा कि हिज्बुल, लश्कर और जैश तीनों एक ही हैं, चाहे फिर वो कश्मीर हो या कहीं और। जो भी बंदूक उठाता है और वो देश के खिलाफ है तो वो आतंकी है, हम उससे निपटेंगे।