Naidunia
    Sunday, December 17, 2017
    PreviousNext

    18 साल के बेटे के साथ एक ही परीक्षा हॉल में बोर्ड परीक्षा दे रहे मां-बाप

    Published: Fri, 17 Mar 2017 07:54 AM (IST) | Updated: Fri, 17 Mar 2017 04:00 PM (IST)
    By: Editorial Team
    family-exam 17 03 2017

    नई दिल्ली। कहा जाता है कि पढ़ने या नया सीखने की कोई उम्र नहीं होती। इस बात को सार्थक किया है पश्चिम बंगाल के बलराम मंडल और कल्याणी मंडल ने। ये दोनों अपने 18 वर्षीय बेटे बिप्लब मंडल के साथ एक ही परीक्षा हॉल में 12वीं की बोर्ड परीक्षा दे रहे हैं।

    पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के उत्तर पतिकबाड़ी गांव के रहने वाले बलराम मंडल अपनी पत्नी कल्याणी मंडल और 18 साल के बेटे बिप्लब मंडल के साथ जिले के बहिरगाछी हाई स्कूल में इन दिनों परीक्षा दे रहे हैं। परिवार के तीनों सदस्यों का परीक्षा केन्द्र एक ही है और कमरा भी।

    एक अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट के अनुसार, एक ही परीक्षा हॉल में परीक्षा दे रहे 18 साल के बिप्लब मंडल ने कहा कि वे और उसके माता-पिता परीक्षा हॉल में एक-दसरे के प्रतियोगी होते हैं। उसके हिसाब से ये परीक्षा तीनों में बेहतर कौन, इसके लिए है। ये सभी लोग जिले के धंताला स्थित हाजरापुर हाई स्कूल के छात्र हैं। इन सभी ने पिछले दो साल तक लगातार सभी क्लास किए हैं। इन लोगों ने बांग्ला, अंग्रेजी, इतिहास, शिक्षा, संस्कृत और दर्शन शास्त्र को परीक्षा के विषय के रूप में चुना है।

    बलराम मंडल की उम्र 42 साल है तो उसकी पत्नी कल्याणी 32 साल की है। ये दोनों दसवीं पास हैं। दोनों ने साल 2013 और 2014 में रविन्द्र मुक्तो विद्यालय से दसवीं की परीक्षा पास की थी।

    बलराम मंडल के पास कुल डेढ़ एकड़ जमीन है जिस पर वो सब्जी उगाते हैं। कभी-कभी वो दूसरों की खेतों में मजदूरी भी करते हैं। आसपास के लोग बताते हैं कि बलराम में पढ़ने की लगन है, इसलिए वो सुबह में जल्दी जागकर खेत का काम निपटाकर जल्दी घर वापस आ जाते हैं और पढ़ने लगते हैं। कल्याणी कहती है कि वो कुछ बकरियां चराती हैं। जब बकरी चर रही होती है तब वो पेड़ के नीचे अपनी पढ़ाई करती हैं, वो समय बर्बाद नहीं करती हैं। वो कहती हैं कि उनकी शादी बलराम से उस वक्त हुई थी जब वो आठवीं में पढ़ती थी।

    बलराम मंडल के पिता का देहांत बचपन में ही हो गया था, जब वो नौवीं में पढ़ते थे। वो पढ़ना चाहते थे लेकिन गरीबी की वजह से नहीं पढ़ सके और गृहस्थी का कामकाज संभाल लिया। फिलहाल तीनों लोग 10 घंटे से ज्यादा की पढ़ाई कर रहे हैं। इनकी अंग्रेजी कमजोर है इसलिए बाहर से उसकी पढ़ाई करते हैं। पैसे की तंगी की वजह से बलराम के बेटे बाहर प्राइवेट ट्यूशन करते हैं फिर वहां से जो पढ़कर आते हैं वो अपने मां-बाप को भी पढ़ाते हैं।

    प्रतिक्रिया दें
    English Hindi Characters remaining


    या निम्न जानकारी पूर्ण करें
    नाम*
    ईमेल*
    Word Verification:*
    Please answer this simple math question.
    +=

      जरूर पढ़ें