नई दिल्ली। न्यायपालिका के इतिहास में बुधवार को ऐसा दूसरी बार हुआ, जब आधी रात को सुप्रीम कोर्ट खोलकर सुनवाई की गई। जब देश सो रहा तब सुप्रीम कोर्ट में दलीलों का दौर जारी था। इससे पहले वर्ष 1993 के मुंबई सीरियल धमाके के दोषी याकूब मेमन मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने आधी रात को सुनवाई की थी।

ताजा मामले में बुधवार रात 1 बजे मुख्य न्यायाधीश ने मामले की सुनवाई के लिए 3 जजों की बेंच गठित की और 2.10 बजे से सुनवाई शुरू हुई। तड़के 5.30 बजे तक चली सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस द्वारा येदियुरप्पा का शपथ रोकने की मांग को ठुकरा दिया।

इससे पहले याकूब का मामला भारतीय न्यायिक इतिहास का पहला मौका था, जब सुप्रीम कोर्ट ने आधी रात को सुनवाई की थी।। 30 जुलाई, 2015 को आधी रात में यह सुनवाई हुई थी। कोर्ट नंबर चार में तीन जजों जस्टिस दीपक मिश्रा, अमिताव रॉय और जेपी पंत ने मामले पर फैसला सुनाया था। उस समय देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एचएल दत्तू थे।

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तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा याकूब की दया याचिका खारिज किए जाने के बाद प्रशांत भूषण सहित कुछ वकीलों ने उसे बचाने के लिए देर यह दांव खेला था। हालांकि, कोर्ट ने रात में ही सुनवाई के बाद याचिका को खारिज कर दिया और आखिरकार याकूब को फांसी देने का रास्ता साफ हुआ था।

याकूब के मामले में रात 3.20 पर सुनवाई शुरू हुई थी और सुबह 4.57 पर अंतिम फैसला आया था। कर्नाटक में राज्यपाल द्वारा भाजपा को सरकार बनाने का न्यौता देने के खिलाफ कांग्रेस ने देर रात को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

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