विजयवाड़ा। कभी दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रधानमंत्री बनवाने का ख्वाब देखने और उसके लिए कड़ी मशक्कत करने वाले टीडीपी प्रमुख चंद्राबाबू नायडू के दिन अभी गर्दिश में चल रहे हैं। मंगलगिरी से विधायक अला रामकृष्ण रेड्डी, जिनके आंध्र प्रदेश राज्य विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष का पदभार संभालने की संभावना है, ने यह कहकर आंध्र प्रदेश की राजनीति में तूफान खड़ा कर दिया है कि टीडीपी प्रमुख को अपना घर खाली करना होगा। रामकृष्ण रेड्डी के मुताबिक चंद्राबाबू का मकान अवैध रूप से नदी के किनारे पर बनाया गया है।

नायडू ने कुछ दिनों पहले ही राज्य सरकार को खत लिखकर अपने घर 'प्रजा वेदिका' का विस्तार करने की अनुमति मांगी थी। ताकि अपने आवास का उपयोग पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात में कर सके। नायडू को नेता प्रतिपक्ष का दर्जा मिला हुआ है और अपने आवास का उपयोग वह ऑफिस के उपयोग में भी करना चाहते हैं। राज्य सरकार ने अभी तक चंद्राबाबू के आवेदन का जवाब नहीं दिया है।

रामकृष्ण रेड्डी ने चंद्राबाबू के बेटे और उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी नारा लोकेश को चुनाव में शिकस्त दी है। उन्होंने इस संबंध में कहा कि वह सभी कानूनी पहलूओं का उपयोग इस बिल्डिंग को खाली कराने के लिए करेगी, क्योंकि इसका निर्माण पर्यावरण के नियमों को ताक में रखकर किया गया है। बिल्डिंग फिलहाल एक उद्योगपति के आधिपत्य में है और पिछली सरकार ने इसको चंद्राबाबू के आवास के लिए ले रखा है। रामकृष्ण रेड्डी ने गुंटुर में कृष्णा नदी के किनारे पर बने अवैध निर्माणों के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया था। उन्होंने दलील दी है कि नदी किनारे बने सभी मकान नियम-कायदों को ताक में रखकर बनाए गए हैं और ये नदी संरक्षण एक्ट के खिलाफ हैं।

रामकृष्ण रेड्डी ने कहा कि हम चंद्राबाबू के अवैध मकान को वैध तरीके से खाली करवाएंगे। उन्होंने चंद्राबाबू के अवैध मकान में रहने की आलोचना भी की और कहा कि चंद्राबाबू ने राजधानी अमरावती के निर्माण के बड़े वादे किए, लेकिन किया कुछ नहीं। अमरावती में उनका खुद का घर भी नहीं है। जबकि सीएम जगनमोहन का अपना घर टडेपल्ली में है। नायडू पिछले 4 साल से इस नदी किनारे वाले बंगले में रह रहे हैं।

वहीं इस मामले में टीडीपी एमएलए पय्यावुला केशव का कहना है कि YSRC बदले की भावना से काम कर रही है। एक तरफ सीएम कहते हैं की वह किसी भी तरह से प्रतिशोध की भावना से काम नहीं करेंगे, दूसरी और उनके विधायक इस तरह के बयान देते हैं। जबकि मामला कोर्ट में है और यदि कोर्ट कोई आदेश देती है तो सभी को उसका सम्मान करना है। जब मामला कोर्ट में है तो इस तरह के बयान देने का कोई मतलब नहीं है।