चेन्नई। वर्ष 2004 में आई भीषण सुनामी को 10 बरस बीत चुके हैं, लेकिन एक पिता आज भी आंखों में उम्मीदों का समंदर लिए अपनी बेटी को तलाशता भटक रहा है। हर साल इन्हीं महीनों में वह कार निकोबार द्वीप आता है। आते-जाते लोगों को बेटी की फोटो थमाकर उसके बारे में पूछता है।

भारतीय वायुसेना के अफसर रवि शंकर को सुनामी ने गहरे जख्म दिए हैं। 26 दिसंबर 2004 को अंडमान निकोबार द्वीप समूह के पोर्ट ब्लेयर में उठी भयावह समुद्री लहरों ने उनसे उनके माता-पिता और एक साल के मासूम बेटे को छीन लिया। बेटी अपूर्वा, जिसे वह प्यार से बुलबुल कहकर पुकारते थे, बिछड़ गई। सुनामी थमने के बाद किसी ने उन्हें बताया था कि उनकी बेटी से मिलती-जुलती शक्ल वाली बच्ची राहत कैंप में है। वह दौड़े-दौड़े वहां पहुंचे थे, लेकिन पता चला कि कोई कबीलाई परिवार उसे अपने साथ ले गया।

26 दिसंबर का वह भयावह दिन

रविशंकर इन दिनों तमिलनाडु के नागपट्टिनम जिले के तटीय शहर वेलंकन्नी में बेटी की तलाश में आए हुए हैं। लोगों को अपने दिल के टुकड़े की तस्वीर बांट रहे हैं। आजकल गुजरात के भुज में तैनात रवि शंकर उस काले दिन की याद करते हुए बताते हैं,"वह रविवार का दिन था। मैं अपनी बेटी और बेटे के साथ सो रहा था। पत्नी ममता चाय बना रही थी। तभी उसे जमीन कंपकंपाने का एहसास हुआ। उसे लगा भूकंप आया है। हम सब अपनी हिफाजत में पहली मंजिल से उतरकर नीचे सड़क पर आ पहुंचे। हमें एक ट्रक दिखा और हम उसी में बैठ गए। तभी समुद्र की लहरों ने हमें अपने आगोश में ले लिया। वह बहुत भयावह क्षण था। अपूर्वा का हाथ मुझसे छूट गया। मेरी पत्नी और बेटा भी अलग हो गया। इसके करीब एक घंटे बाद मेरा एक दोस्त बेटे को गोद में लिए ममता के साथ आता दिखा। बच्चे को देखकर मैं समझ गया कि कुदरत ने मासूम को हमसे छीन लिया है।"

रवि शंकर बताते हैं,"इसके बाद हम अपूर्वा की तलाश में जुट गए लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। अगले दिन वायुसेना ने हमें चेन्नई भेज दिया।" वह कहते हैं कि आज उनकी बेटी जिंदा हुई तो वह 18 बरस की हो गई होगी।

रोती दिखी थी अपूर्वा

इस आपदा के एक महीने बाद रवि शंकर अपूर्वा की फोटो लिए पोर्ट ब्लेयर गए। किसी ने उन्हें बताया कि अपूर्वा रोती हुई दिखी थी। वह कह रही थी,"मेरे मम्मी-पापा नहीं रहे। मेरा इस दुनिया में कोई नहीं।" बीते सालों में उन्हें अपूर्वा के यहां-वहां देखे जाने की बात मालूम हुई। स्थानीय लोगों ने बताया कि पोर्ट ब्लेयर के राहत कैंप में अपूर्वा देखी गई थी। बीच में उसके कर्नाटक के कोलार क्षेत्र में होने की बात पता चली लेकिन आज तक अपूर्वा का सही ठिकाना पता नहीं लग पाया।

फोन कर दें जानकारी

रविशंकर दंपति आज अपने पांच साल के बेटे अमर्त्य अरुण के साथ उस दुख के पहाड़ से पार पाने की कोशिश कर रहे हैं। अगर किसी को अपूर्वा के बारे में कोई जानकारी है तो वह रवि शंकर के मोबाइल नंबर 09868763263 पर फोन कर सकता है।