नई दिल्ली। अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए क्रीमी लेयर सीमा दस लाख रुपये करने की लगातार मांग हो रही है। इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चर्चा की जाएगी। बुधवार को रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआइ) के नेता और केंद्रीय सामाजिक न्याय तथा अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास अठावले ने यह जानकारी दी।

उन्होंने कहा, "मैं प्रधानमंत्री मोदी के समक्ष इस मुद्दे को उठा सकता हूं।" वर्तमान में ओबीसी क्रीमी लेयर की सीमा छह लाख रुपये प्रतिवर्ष है। यह मांग उचित है, क्योंकि लोगों की आय बढ़ रही है। यदि सरकार क्रीमी लेयर की सीमा बढ़ाती है, तो ओबीसी वर्ग के और अधिक लोग आरक्षण के दायरे में आएंगे।

मालूम हो, ओबीसी क्रीमी लेयर में आने वाले व्यक्तियों को सरकारी कॉलेजों, संस्थानों और नौकरियों में आरक्षण का लाभ नहीं मिलता। 1993 में ओबीसी क्रीमी लेयर के मापदंड को परिभाषित किया गया था।

तब इसकी सीमा एक लाख रुपये सालाना रखी गई थी। 2004 में इसे बढ़ाकर 2.5 लाख, 2008 में 4.5 लाख और 2013 में छह लाख रुपये किया गया। हालांकि अक्टूबर, 2015 में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग ने सिफारिश की थी कि 15 लाख रुपये तक की सालाना आय वाले ओबीसी परिवार को क्रीमी लेयर में नहीं शामिल किया जाना चाहिए।