नई दिल्ली। सिर पर मैला ढोने और हाथ से मैला सफाई करने के अमानवीय चलन को खत्म करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। केंद्रीय सामाजिक न्याय और आधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने कहा कि ऐसे लोगों की पहचान के लिए जरूरी कदम पहले ही उठा लिए गए हैं। गहलोत सोमवार को यहां सुलभ इंटरनेशनल के एक कार्यक्रम में बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि काफी संख्या में ऐसे लोगों का पुनर्वास पहले ही किया जा चुका है। सुलभ इंटरनेशनल के प्रयासों की सराहना करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सुलभ के शौचालय के मॉडल से देश में जारी इस अमानवीय और भेदभाव के माहौल को दूर किया जा सकता है। उन्होंने सुलभ स्वच्छता अभियान के संस्थापक डॉक्टर बिंदेश्वर पाठक से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील भी की।

हाथ से मैला सफाई के काम से मुक्त कराई गईं राजस्थान के टोंक और अलवर जिले की महिलाओं को केंद्रीय मंत्री ने सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया। इस मौके पर सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक पाठक ने मंत्री को भरोसा दिया कि वे प्रधानमंत्री मोदी के सपनों को पूरा करने में पूरा योगदान देंगे। उन्होंने कहा कि देश में शौचालय अभियान के जरिये देश से हाथ से मैला सफाई के अमानवीय प्रथा को खत्म करने के लिए 45 सालों से जुटे हुए हैं।