रघुवरशरण, फैजाबाद। गुमनामी बाबा का 1975 में ही फैजाबाद से रिश्ता जुड़ा। 2000 में मुखर्जी आयोग के आयुक्त को दिए गए बयान में होम्योपैथी के मशहूर चिकित्सक डॉ. पी. बनर्जी ने बताया है कि 1975 के आसपास उनका परिवार भगवन जी (गुमनामी बाबा) के संपर्क में आया, जब बाबा की सेवा करने वाली सरस्वती नाम की महिला उनकी क्लीनिक पर आईं और बाबा को बीमार बताकर अपने साथ चिकित्सक पिता डॉ. टीसी बनर्जी को लेकर गईं। पिता अयोध्या से जब वापस आए तो बड़े उत्तेजित और घबराए हुए थे। परिवार के लोगों से उन्होंने बताया कि मैं नेता जी से मिलकर आ रहा हूं।

उस दिन के बाद से बनर्जी परिवार का बाबा से संपर्क बना रहा। बनर्जी के अनुसार, एक बार उनकी दादी कोलकाता से फैजाबाद आईं और उनकी मुलाकात बाबा से कराई गई। बाबा ने उनसे बंगाली में गीत गाने को कहा, तो दादी ने रवींद्रनाथ टैगोर के गीत सुनाए। गीत सुन बाबा रोने लगे और उन्होंने बताया, हमारे टैगोर से गहरे ताल्लुकात थे।

बयान में डॉ. बनर्जी ने बताया कि बाबा आम तौर पर पर्दे की ओट में रहते थे पर बहुत निवेदन करने पर उन्होंने दादी को सामने आने का अवसर दिया और दादी उनके सामने पहुंचते ही नेता जी कहकर अवाक रह गईं। नेता जी से जुड़े ऐसे रोचक प्रसंग कई अन्य गवाहों के भी बयान से उद्घाटित हुए हैं। अप्रैल, 1980 की तारीख थी, जब एक स्थानीय समाचार पत्र में नेता जी के पड़ोसी जिले बस्ती में होने की खबर प्रमुखता से छापी।

हुआ यूं कि बस्ती प्रवास के दौरान गुमनामी बाबा का एक भक्त फैजाबाद आया और एक मेडिकल स्टोर से दवा खरीदी। बात-बात में भक्त ने दुकानदार को बताया कि वह जिन बाबा की दवा ले रहा है, वे नेता जी सुभाषचंद्र बोस हैं। भक्त ने उत्साह में आकर एलान किया कि 23 जनवरी (नेता जी का जन्मदिन) को नेता जी सुभाषचंद्र बोस देश के नाम संदेश देंगे।

इस वार्तालाप का साक्षी एक पत्रकार भी था और उसने इस सूचना को प्रकाशित किया। इसी के साथ ही मीडिया में बाबा जय गुरुदेव का वह एलान भी छपा जिसमें उन्होंने नेता जी को जनता के समक्ष पेश करने की बात कही थी। हालांकि जय गुरुदेव ऐसा नहीं कर सके और कानपुर के मंच पर ही उन्हें जनता का कोपभाजन बनना पड़ा।