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    कठुआ कांड : पीड़ित बच्ची की मां बोली- दुष्कर्मियों को हो फांसी

    Published: Sun, 15 Apr 2018 08:56 AM (IST) | Updated: Sun, 15 Apr 2018 08:58 AM (IST)
    By: Editorial Team
    kathua rape 15 04 2018

    ऊधमपुर। जम्मू के कठुआ में बकरवाल समाज अपनी आठ वर्षीय बेटी के साथ हुई बर्बर वारदात से इतना सहमा हुआ है कि अपना बसेरा कहीं और ले जाने की तैयारी में जुटा है। लेकिन, पीड़िता की मां अपने दर्द को चाहकर भी नहीं समेट पा रही। वह कहती है- 'वह (बेटी) बहुत ही सुंदर और तेज थी। मैं चाहती थी कि वह बड़ी होकर डॉक्टर बने।' लेकिन बदली परिस्थिति में अब उनकी एक इच्छा है। वह कहती हैं- 'मेरी एक ही इच्छा है कि इस जघन्य अपराध के दोषियों को फांसी पर लटकाया जाए, ताकि किसी दूसरे परिवार को इस पीड़ा का सामना नहीं करना पड़े।'

    वहीं, पिता का कहना है कि घटना को धार्मिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। पीड़िता जब एक साल की थी तभी कठुआ के रिसाना में रहने वाले उसके मामा-मामी ने उसे गोद ले लिया था। मां को अब इस बात का मलाल है कि उसने अपनी बेटी को क्यों अपने भाई के घर छोड़ा? वह कहती हैं- 'उसे क्यों मारा? वह तो मवेशियों को चराती और घोड़ों की देखभाल करती थी। वह आठ साल की थी। उसे क्यों ऐसे बर्बर तरीके से मारा? उन्हें फांसी दी जानी चाहिए।'

    पीड़िता के पिता भी कहते हैं- 'हत्यारों को फांसी दी जानी चाहिए। हमें सीबीआई जांच की जरूरत नहीं, हमें क्राइम ब्रांच की जांच पर भरोसा है।' मालूम हो कि घूमंतु मुस्लिम बकरवाल समाज की इस लड़की से बर्बर दुष्कर्म और उसकी हत्या के बाद से जम्मू में स्थिति तनावपूर्ण है। पशुओं को चराने गई लड़की के गायब होने के एक सप्ताह बाद उसका शव 17 जनवरी को रसाना जंगल में मिला था। पीड़िता की मां का कहना है कि हिंदुओं के साथ पहले उनके अच्छे संबंध थे, लेकिन इस घटना के बाद अब हम डरे हुए हैं। हमें अब सिर्फ न्याय चाहिए। वह हमारी प्यारी और सुंदर बच्ची थी। हम तो उसे वापस ले जाकर पढ़ाना और डॉक्टर बनाना चाहते थे।

    लड़की के मामा सवाल करते हैं- 'प्रधानमंत्री ने कहा था कि बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ, लेकिन क्या वे इसी तरह बेटियों को पढ़ाएंगे और बचाएंगे। मंत्रीगण दुष्कर्म के आरोपितों का समर्थन कर रहे हैं, कहते हैं कि वे निर्दोष हैं लेकिन वे गलत हैं। लड़की के पिता का कहना है कि दुनिया जानती है कि उनकी बेटी को हिंदू और मुसलमानों में भेद नहीं मालूम लेकिन उसकी बर्बर तरीके से हत्या कर दी गई। घटना को धार्मिक चश्मे नहीं देखा जाना चाहिए।

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