अमेठी। राहुल गांधी की सांसद निधि से होने वाले विकास कार्यों में जमकर "खेल" हुआ। दो सड़कों का निर्माण बिना टेंडर ही करा दिया गया। कई जगह पहले से निर्मित सड़कों के लिए दोबारा टेंडर आमंत्रित कर लिए गए। अब राहुल की निधि से हुए सभी विकास कार्य जांच की जद में हैं।

दिलचस्प बात यह है कि सांसद निधि के कार्यों में गड़बड़ी होती रही और स्थानीय कांग्रेस नेताओं व लाभान्वित होने वाले इलाकों के पार्टी कार्यकर्ताओं को उसका अहसास ही नहीं हुआ। वर्ष 2011-12 में सांसद राहुल गांधी ने अपनी निधि से 67 विकास कार्यों के लिए एक करोड़ 73 लाख 63 हजार रुपए दिए। जिसमें 26 सड़कों के साथ यात्री प्रतीक्षालय, रैन बसेरा व बरातघरों का निर्माण होना था।

ऐसा नहीं है कि निर्माण कार्य ही नहीं हुए। हुआ सब कुछ, लेकिन गुणवत्ता व मानक को ताक पर रखकर। 2012-13 में 88 विकास कार्यों के लिए सात करोड़ 92 लाख 77 हजार रुपए दिए गए। जिनमें 75 सड़कों के साथ ही यात्री प्रतीक्षालय, शेड, चबूतरा बनवाया जाना था। जिले के भेटुआ, बहादुरपुर में ऐसी सड़कों को टेंडर प्रक्रिया में शामिल किया गया था, जिनका निर्माण पहले ही हो चुका था।

बाजार शुकुल में दो सड़कों का निर्माण भी बिना टेंडर प्रक्रिया पूरी हुए ही करा दिया गया है। यह महज ग्रामीण अभियंत्रण सेवा विभाग के कार्यों की बानगी भर है। मजेदार बात तो यह है कि सांसद निधि से बनने वाली सड़कों का टेंडर 12 नवंबर को होना था, लेकिन सूची में ऐसी सड़कों का नाम शामिल था, जो पहले से ही बनाई जा चुकी हैं।

सड़कों के निर्माण में हो रहे खेल की भनक जब राहुल गांधी से जुड़े लोगों को लगी तो आनन फानन में जिला प्रशासन ने टेंडर प्रक्रिया पर ही रोक लगाते हुए सांसद निधि से हुए कार्यों पर जांच बैठा दी। अधिशाषी अभियंता, ग्रामीण अभियंत्रण सेवा प्रखंड जिलेदार खां ने कहा कि अगर ऐसा हुआ है, तो जांच के बाद कार्रवाई होगी।

डीएम जगतराज ने बताया कि सांसद निधि से बनने वाली सड़कों के निर्माण में मानक की अनदेखी और बिना टेंडर के सड़क का निर्माण करवाए जाने की शिकायत मिली है। जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।