कोच्चि। केरल सरकार ने विश्व हिंदू परिषद द्वारा चलाए जा रहे घर वापसी अभियान का राजनीतिक तौर पर मुकाबला करने के लिए इस वर्ष के बजट में विशेष आवंटन किया है। वित्त मंत्री केएम मणि ने एक आयोग के गठन का प्रस्ताव किया है, जो धर्म परिवर्तित ईसाइयों को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए उपाय सुझाएगा। इसके लिए पांच करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। राज्य में धर्म परिवर्तित ईसाइयों की संख्या करीब 20 लाख है।

सरकार के इस फैसले पर मिलीजुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है। हिंदू ऐक्य वेदी के महासचिव के. राजशेखरन ने शनिवार को पूछा कि क्या सरकार पांच करोड़ रुपये का प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तित लोगों को ईसाई बनाए रखने में सफल होगी? उन्होंने कहा कि ईसाई धर्म अपनाने के बावजूद इन लोगों के सामाजिक स्तर में कोई फर्क नहीं आया है।

सायरो मालाबार चर्च के प्रवक्ता फादर पॉल थेल्लाकत ने अनुसूचित जाति और जनजाति को मिलने वाले आरक्षण की ओर इशारा करते हुए कहा कि धर्म बदल लेने के बाद उन्हें इससे वंचित कर दिया जाता है। मणि ने बजट में जो घोषणा की है, उसके बार में केरल अल्पसंख्यक आयोग पहले ही सिफारिश कर चुका है।

दूसरी तरफ, विकास अध्ययन केंद्र, तिरुअनंतपुरम के प्राध्यापक इरुदया राजन एस. ने कहा कि दलितों की तुलना में धर्मपरिवर्तित ईसाइयों की हालत राज्य में बेहतर है।