जोध सिंह रावत, चमोली। चमोली जिले के गैरसैंण विकासखंड स्थितस्यूणी मल्ली के मांझी बीते छह दिन से श्रमदान कर आगरचट्टी-स्यूणीमल्ली (छह किमी) मोटर मार्ग के निर्माण में जुटे हुए हैं। अब तक वे सिविल भूमि में 55 मीटर से अधिक सड़क तैयार कर चुके हैं। हालांकि इससे वन क्षेत्र में ग्रामीणों और वन विभाग के बीच टकराव की आशंका भी है। सड़क का कुछ भाग वन भूमि से होकर भी गुजरेगा।

वन विभाग चेतावनी दे चुका है कि वन क्षेत्र में अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं होगा। उधर ग्रामीणों का कहना है कि किसी भी दशा में निर्माण कार्य नहीं रुकेगा। चमोली की जिलाधिकारी स्वाति भदौरिया ने बताया कि सड़क निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जल्दी ही निर्माण शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जल्द ही वे ग्रामीणों से बात करेंगी।

रविवार को भी ग्रामीण श्रमदान करने स्यूणी मल्ली पहुंचे। सड़क निर्माण संघर्ष समिति के अध्यक्ष जमन सिंह व ग्राम प्रधान लीला देवी ने बताया कि क्षेत्र के ग्रामीण बीते 22 साल से आगरचट्टी-स्यूणीमल्ली मोटर मार्ग के निर्माण को संघर्ष कर रहे हैं। पिछले साल छह जनवरी को जब मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस सड़क का शिलान्यास किया तो उम्मीद जगी।

लेकिन, एक साल बीतने के बाद भी कुछ नहीं हुआ। ऐसे में इस साल सात जनवरी को ग्रामीण स्वयं कुदाल उठाकर सड़क निर्माण में जुट गए। हैरत देखिए कि उच्चाधिकारियों की इसकी खबर होने के बावजूद कोई भी जिम्मेदार अधिकारी अथवा जनप्रतिनिधि अब तक मौके पर नहीं पहुंचा है। हां! शनिवार को गैरसैंण के राजस्व उपनिरीक्षक ग्रामीणों से बात करने जरूर पहुंचे थे, लेकिन वार्ता नहीं हो सकी।

14 से 16 किमी की दूरी पैदल नापते हैं नौनिहाल

तहसील मुख्यालय गैरसैंण से पांच किमी और आगरचट्टी से सात किमी की चढ़ाई पर है स्यूणी मल्ली गांव। स्थिति यह है कि मोटर मार्ग न होने के कारण गांव के 50 से अधिक बच्चों को आठवीं से आगे की पढ़ाई के लिए मेहलचौरी व आगरचट्टी की 14 से 16 किमी की दूरी रोजाना पैदल नापनी पड़ती है। रास्ते में घना जंगल होने के कारण जंगली जानवरों से खतरा हर वक्त बना रहता है। ऐसे में अभिभावकों की निगाहें बच्चों के घर लौटने तक रास्ते की ओर ही लगी रहती हैं।

उपचार न मिलने से 28 लोग तोड़ चुके दम

सड़क न होने का सबसे ज्यादा खामियाजा बीमार लोगों व गर्भवती महिलाओं को भुगतना पड़ता है। ग्राम प्रधान लीला देवी बताती हैं कि बीते एक दशक में 28 ग्रामीण समय पर अस्पताल न पहुंचने के कारण दम तोड़ चुके हैं। इनमें गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और काश्तकारी के दौरान हादसों में चोटिल हुए ग्रामीण शामिल हैं।