तिरुवनंतपुरम। केरल के सबरीमाला मंदिर में प्रवेश के बाद महिलाओं ने सोमवार को राज्य की एक और पुरानी परंपरा तोड़ दी है।

के धान्या सानल ने राज्य की दूसरी सबसे ऊंची अगस्त्यार्कुडम चोटी की चढ़ाई शुरू कर दी। आदिवासी परंपरा के अनुसार इस पर्वत पर महिलाओं की चढ़ाई वर्जित थी।

हाई कोर्ट ने नवंबर में इस चोटी पर महिलाओं की चढ़ाई पर लागू परंपरागत प्रतिबंध हटा दिया था। अगस्त्यार्कुडम यूनेस्को विरासत में शामिल है। यहां पर्वतारोहण कार्यक्रम एक मार्च तक चलेगा।

राज्य की राजधानी से 50 किलोमीटर दूर बोनाकाउड से धान्या ने सोमवार को पुरुष पर्वतारोहियों के साथ पारंपरिक जंगल के रास्ते पहाड़ की चोटी की चढ़ाई शुरू की।

रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि धन्या उन 100 पर्वतारोहियों के पहले जत्थे में शामिल अकेली महिला हैं, जिसने 1,868 मीटर ऊंची इस चोटी की चढ़ाई शुरू की है।

यात्रा की शुरुआत से पहले धान्या ने कहा, 'यह यात्रा जंगल को और समझने तथा अपने अनुभवों को दूसरों से साझा करने के लिए है।' हाई कोर्ट के लैंगिक प्रतिबंध खत्म करने संबंधी नवंबर में दिए गए आदेश के बाद नेय्यार वन्यजीव सेंचुरी में स्थित अगस्त्यार्कुडम को पहली बार वार्षिक पर्वतारोहण के लिए खोला गया है।

पहाड़ की तलहटी में रहने वाले आदिवासी कानी समुदाय के लोगों ने महिला की चढ़ाई का विरोध किया। सौ से भी ज्यादा आदिवासी समुदाय के लोग बोनाकाउड में इकट्ठा हुए और लोकगीत गाते हुए विरोध जताया।

आदिवासी महासभा के प्रदेश अध्यक्ष मोहनन त्रिवेणी ने कहा, 'अगस्त्य चोटी की रीति-रिवाजों को तोड़ने पर हमने अपने दर्द और गुस्से के इजहार के लिए प्रदर्शन किया।

हमने किसी भी पर्वतारोही को जांचने की कोशिश भी नहीं की, क्योंकि हम अदालत का सम्मान करते हैं।' कानी समुदाय के अनुसार, 'यह पर्वत उनके देवता अगस्त्य मुनि का निवास स्थल है। हिंदू धार्मिक कथा के अनुसार ऐसा माना जाता है कि अगस्त्य मुनि इस समुदाय के संरक्षक हैं।'

100 महिलाओं ने कराया है पंजीकरण

पर्वतारोहण कराने वाले वन विभाग ने बताया कि कुल 4700 लोगों ने इस साल पंजीकरण कराया है। इनमें 100 महिलाएं शामिल हैं।

वन विभाग के नोटिस पर महिलाएं हुई थीं सक्रिय

वर्ष 2015 में एक महिला समूह ने गौर किया कि वन अधिकारियों ने 14 साल से कम उम्र के बच्चों व महिलाओं को वार्षिक ट्रैकिंग में भाग लेने से रोकने के लिए एक नोटिस जारी किया था।

एम सुल्फथ की अगुवाई वाली पेनोरूमा और पूर्व नक्सली के अजीता की अन्वेषी नामक संस्था ने यहां महिलाओं को एकजुट किया। बाद में लैंगिग भेदभाव के खिलाफ उन्होंने कोर्ट का रुख कर दिया।