नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 की वैधानिकता को चुनौती देने के लिए सुपीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई सहित 3 जजों की बेंच इस PIL पर सुनवाई कर रही है। PIL पर अंतिम सुनवाई के लिए 2 अप्रैल मंगलवार का दिन तय किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका वरिष्ठ वकील अश्विनी उपाध्याय ने दाखिल की है। इसमें कहा गया है कि संविधान के निर्माण के समय यह विशेष प्रावधान अस्थायी प्रकृति का था और अनुच्छेद 370(3) तो 26 जनवरी, 1957 को जम्मू एवं कश्मीर संविधान सभा भंग होने के साथ ही खत्म हो गई।

अपनी जनहित याचिका में वकील उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि वह जम्मू-कश्मीर के अलग संविधान को मनमाना और असंवैधानिक घोषित करे। क्योंकि यह भारतीय संविधान की श्रेष्ठता के खिलाफ है। यह एक राष्ट्र, एक संविधान, एक राष्ट्रीय गान एवं एक राष्ट्रीय ध्वज की अवधारणा के भी विरूद्ध है।

उनका तर्क है, जम्मू-कश्मीर का संविधान इस कारण भी मुख्यतया अवैध है क्योंकि इसे अभी तक राष्ट्रपति की स्वीकृति नहीं मिली है। भारतीय संविधान के तहत राष्ट्रपति की मंजूरी जरूरी है।

वकील आरडी उपाध्याय के जरिये दाखिल जनहित याचिका में अश्विनी उपाध्याय ने दावा किया है कि अनुच्छेद 370 की वैध रहने की अधिकतम मियाद केवल संविधान सभा के अस्तित्व में रहने तक ही थी, जो कि 26 जनवरी, 1950 थी। इस दिन भारतीय संविधान को स्वीकार किया गया था।

याचिका में कहा है कि जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में अनुच्छेद 370 एक अस्थायी प्रावधान है। यह अनुच्छेद केंद्रीय व समवर्ती सूचियों में शामिल विषयों पर कानून बनाने के संसद के अधिकारों में कटौती कर कई संवैधानिक प्रावधानों को राज्य में लागू होने से रोकता है। इसके परिणामस्वरूप जम्मू-कश्मीर राज्य अपने स्थायी नागरिकों को विशेष अधिकार व सुविधाएं प्रदान करता है।