श्रीनगर। सीआरपीएफ के महानिदेशक आरआर भटनागर ने गुरुवार को श्रीनगर के कर्णनगर इलाके में हुई मुठभेड़ में शहीद बिहार के मोहम्मद मोजाहिद खान के परिजनों द्वारा लौटाई गई पांच लाख की अनुग्रह राशि के विवाद को जल्द हल करने का यकीन दिलाया। उन्होंने कहा कि यह राशि बिहार सरकार ने दी थी। हम उनके साथ संपर्क में हैं, अगले एक -दो दिन में यह मामला हल हो जाएगा और शहीद के परिजनों को पर्याप्त मुआवजा मिलेगा।

उन्होंने कहा कि हम अपने शहीदों के परिजनों का पूरा ध्यान रखते हैं। उन्होंने कहा कि कर्णनगर हमले को नाकाम बनाने वाले कांस्टेबल रघुनाथ घैते के साथ कुछ समय पहले उत्तरी कश्मीर के सुंबल इलाके में एक आत्मघाती हमले को नाकाम बनाकर चार आतंकियों को मार गिराने वाले जवानों व अधिकारियों को भी समय पूर्व एक रैंक पदोन्नत करने की प्रक्रिया जारी है।

लश्कर के दो आत्मघाती आतंकियों ने गम सोमवार को श्रीनगर के कर्णनगर इलाके में स्थित सीआरपीएफ के एक वाहिनी मुख्यालय में हमले का प्रयास किया था, लेकिन सजग संतरी रघुनाथ घैते की त्वरित कार्रवाई के बाद आतंकियों को भागना पड़ा था। बाद में जवानों ने 32 घंटे चली मुठभेड़ में दोनों आतंकियों को मार गिराया। इस दौरान सीआरपीएफ का एक जवान मोजाहिद खान भी शहीद हो गया था। कर्णनगर हमले को नाकाम बनाने और वादी में बीते छह माह के दौरान विभिन्न आतंकरोधी अभियानों में उल्लेखनीय भूमिका निभाने वाले जवानों व अधिकारियों को सम्मानित करने के लिए सीआरपीएफ के महानिदेशक आरआर भटनागर श्रीनगर आए थे।

शहीद मोजाहिद खान का जिक्र करते हुए महानिदेशक ने कहा कि अलग-अलग राज्य में शहीदों को दी जाने वाली मुआवजा राशि की दरें अलग हैं, लेकिन हम अपने शहीदों के परिजनों का पूरा ध्यान रखते हैं। उनके कल्याण के लिए हर संभव कदम उठाते हैं। शहीदों के परिजनों को वित्तीय दिक्कत न हो, इसलिए हमने भारत के वीर नाम से एक कोष भी बनाया है।

इसमें 25 करोड़ की राशि जमा हुई है, जिसमें से एक बड़ा भाग शहीद जवानों के परिजनों को प्रदान किया गया है। इसके अलावा हम हर साल शहीदों के परिजनों के साथ संवाद करते हैं, जिन स्कूलों में वह पढ़े लिखे होते हैं, वहां भी एक समारोह आयोजित करते हैं ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके शौर्य, बलिदान और देशप्रेम से प्रेरित हों। केंद्र सरकार भी कई योजनाएं चला रही हैं।

वादी में आतंकरोधी अभियानों संबंधी सवाल पर उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ, पुलिस व सेना समेत सभी सुरक्षा एजेंसियां आपस में पूरे समन्वय के साथ काम कर रही हैं। इसी कारण बीते साल कश्मीर में कई नामी आतंकी कमांडर मारे गए और यह सिलसिला इस साल भी जारी रहेगा।