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    यूपी विधान परिषद में गरमाया सभापति के अधिकार का मुद्दा

    Published: Thu, 15 Feb 2018 11:13 PM (IST) | Updated: Thu, 15 Feb 2018 11:19 PM (IST)
    By: Editorial Team
    up legislative council india 150218 15 02 2018

    लखनऊ। सभापति द्वारा नोएडा में हुए एनकाउंटर की सीबीआइ जांच कराने के निर्णय के बाद गुरुवार को विधान परिषद में सभापति के अधिकार का मुद्दा छाया रहा। भाजपा की ओर से देवेंद्र प्रताप सिंह सभापति के निर्णय पर पुनर्विचार याचिका लेकर आए।

    इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह सदन संवैधानिक प्रावधानों से चलाया जाना चाहिए न कि बाहरी ताकतों से। सीबीआइ केंद्र सरकार के अधीन कार्य करती है। हम विधानसभा में बैठकर यदि दिल्ली व बिहार के बारे में कोई निर्णय देंगे तो हंसी का पात्र बनेंगे। पीठ से ऐसा निर्णय नहीं होना चाहिए जिससे उच्च सदन हंसी का पात्र बने। सभापति रमेश यादव ने सरकार व विपक्ष की बातें सुनने के बाद सीबीआइ जांच के पुनर्विचार का निर्णय सुरक्षित कर लिया।

    भाजपा सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि सीबीआइ जांच का फैसला संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत है। राज्य विधान मंडल के क्षेत्राधिकार राज्य की जांच एजेंसियों तक ही सीमित है। केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच कराने के नियम पहले से तय हैं। पीठ का निर्णय केंद्र सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं है। इस मामले में कार्य स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा स्वीकार किए बिना ही पीठ ने अपना निर्णय सुना दिया है।

    इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि नोएडा मामला तो पहले ही साफ है। इसे पुलिस ने भी अपनी जांच में एनकाउंटर नहीं माना है। दोषी सब इंस्पेक्टर का जिम ट्रेनर जितेन्द्र यादव से विवाद था। रिवाल्वर में गोली फंसने के कारण चल गई थी। इसमें दोषी दारोगा को गिरफ्तार कर लिया गया है। विपक्ष के पास इस समय कोई मुद्दा नहीं है। मुद्दा विहीन विपक्ष जनहित के मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए इसे मुद्दा बनाना चाहता है।


    पीठ पर टिप्पणी पर सपा सदस्यों ने जताई आपत्ति-

    नेता प्रतिपक्ष अहमद हसन ने कहा कि सभापति को यह शक्ति है कि वह किसी मामले की जांच के लिए सरकार को निर्देश दें। सरकार इसकी जांच कराती है या नहीं, यह उसकी नीयत का मामला है। पीठ की गरिमा रखी जानी चाहिए। यह मानवीय समस्या है जिसे सपा ने उठाया था। इस तरह से पीठ के निर्णय पर सवाल नहीं उठाए जाने चाहिए। वहीं, सपा सदस्यों ने योगी के भी वक्तव्य पर आपत्ति जताई।


    आगे भी जारी रहेगा एनकाउंटर का सिलसिला-

    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अपराधों को संरक्षण कौन देता है, यह नेता प्रतिपक्ष से अच्छा कौन जानता है। वह आइपीएस अफसर भी रहे हैं। जब से प्रदेश में हमारी सरकार बनी है, तब से अब तक 1200 एनकाउंटर हुए हैं। इनमें 40 से ज्यादा दुर्दांत अपराधी मारे गए हैं। यह सिलसिला थमेगा नहीं, आगे भी जारी रहेगा।

    उन्होंने महिलाओं के साथ गैंग रेप, हत्या, लूट व डकैती जैसे अपराध होंगे तो सरकार अपराधियों को कुचलने का हर संभव प्रयास करेगी। ऐसे अराजक और अपराधी तत्वों के प्रति कुछ लोग सहानुभूति व्यक्त कर रहे हैं। यह समाज और लोकतंत्र के हित में नहीं है।

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