लखनऊ। जबलपुर स्थित 506 आर्मी बेस वर्कशॉप में तैनात एक लेफ्टिनेंट कर्नल के खिलाफ चल रहे "हनी ट्रैप" के आरोप की जांच का सच उनसे बरामद इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बताएगी। मिलिट्री इंटेलिजेंस ने उनकी डिवाइस को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा है।

जांच में यह पता लगाया जाएगा कि लेफ्टिनेंट कर्नल ने अपने मोबाइल फोन या फिर कम्प्यूटर से किसी को गोपनीय सूचनाएं तो नहीं भेजी हैं। उनकी आइटी डिवाइस से जो भी डाटा डिलीट किया गया है उसकी रिकवरी भी कराई जाएगी।

वहीं सेना की ओर से बताया गया है कि लेफ्टिनेंट कर्नल से पूछताछ कर ली गई है। उनको ड्यूटी पर जाने को कहा गया है। नई दिल्ली स्थित सेना की खुफिया इकाई मुख्यालय को सूचना मिली थी कि जबलपुर में तैनात एक लेफ्टिनेंट कर्नल ने अपनी आइटी डिवाइस से गोपनीय सूचनाएं लीक की हैं।

इस सूचना के आधार पर खुफिया इकाई ने जबलपुर में मिलिट्री पुलिस के साथ मिलकर लेफ्टिनेंट कर्नल के ऑफिस में छापेमारी की थी। इस छापेमारी में करीब 12 घंटे तक उनके कम्प्यूटर को खंगाला गया था। इस बीच लेफ्टिनेंट कर्नल को भी मिलिट्री इंटेलिजेंस ने पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया था।

मामला "हनी ट्रैप" से जोड़कर देखा जा रहा था। हालांकि सूचना तो यह भी दी जा रही थी कि इस अधिकारी के बैंक खाते में एक करोड़ रुपये का ट्रांजिक्शन हुआ है। लेकिन सेना मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक ऐसा नहीं है पर "हनी ट्रैप" को लेकर जांच की जा रही है।


12 फरवरी को हुए थे जांच के आदेश-

लेफ्टिनेंट कर्नल की आइटी डिवाइस से गोपनीय सूचनाएं लीक होने की सूचना पर जांच के आदेश 12 फरवरी को दिए गए थे। मध्य कमान मुख्यालय की जनसंपर्क अधिकारी गार्गी मलिक सिन्हा ने बताया कि लेफ्टिनेंट कर्नल से एक जांच प्रक्रिया के तहत ही पूछताछ की जा रही है।

पूछताछ के बाद सैन्य अधिकारी ने अपनी ही यूनिट में गुरुवार से ड्यूटी ज्वाइन कर ली है। सेना का कहना है कि जांच रिपोर्ट आए बिना लेफ्टिनेंट कर्नल के "हनी ट्रैप" में फंसने या फिर बैंक में ट्रांजिक्शन होने की बात भी सही नहीं है।


इस मामले में जांच चल रही है। कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा। हनी ट्रैपिंग या मनी ट्रांसफर के अब तक कोई प्रमाण नहीं मिले हैं। -गार्गी मलिक सिन्हा, पीआरओ डिफेंस, लखनऊ