प्रकाश भारद्वाज, शिमला। कंपनियों द्वारा काले धन को सफेद करने के लिए हिमाचल में जमीन खरीदने या बेचने की आशंका को देखते हुए सीबीआई ने प्रदेश में पहरा बिठा दिया है। सीबीआई ने हिमाचल सरकार को देश की 638 कंपनियों की सूची सौंपते हुए कहा है कि इन कंपनियों के नाम पर किसी संपत्ति की रजिस्ट्री करने से पहले सीबीआई को सूचना दी जाए।

अगर सीबीआई संपत्ति खरीदने की अनुमति देती है तभी कंपनियों के नाम पर रजिस्ट्री होगी।सीबीआई ने प्रदेश के मुख्य सचिव को गत जून में पत्र भेजकर आशंका जताई थी कि कुछ लोगों ने फर्जी कंपनियों का गठन किया है। कंपनियों की सूची मिलने पर प्रदेश सरकार ने दस जिलों के उपायुक्तों को निर्देश जारी कर दिए हैं।

उपायुक्तों की जिम्मेदारी होगी कि सूची में शामिल किसी कंपनी के नाम पर जमीन खरीदने या बेचने के लिए कोई व्यक्ति आए तो जिला प्रशासन दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय से संपर्क कर जांच एजेंसी को जमीन की खरीद फरोख्त करने वाले की जानकारी दी जाएगी।

प्रदेश सरकार ने इस संबंध में राजस्व विभाग को भी विशेष हिदायत जारी कर दी है, वहीं राजस्व विभाग ने भी जिलों में अधिकारियों को सूचित करते हुए उपायुक्तों को कंपनियों की सूची सौंप दी है। प्रदेश के दो जिलों किन्नौर और लाहुल स्पीति में वहां के स्थानीय निवासियों के अलावा कोई व्यक्ति जमीन नहीं खरीद सकता है। इसलिए इन जिलों के उपायुक्तों को निर्देश जारी नहीं हुए हैं।

सूची में दस राज्यों की नामी रियल एस्टेट कंपनियां

सीबीआई की ओर से दी गई सूची में देश के दस राज्यों की नामी रियल एस्टेट कंपनियां शामिल हैं। ऐसे बिल्डर्स सूची में शामिल हैं जिनका संबंध हिमाचल से है। मंडी शहर की कंपनियों का भी सूची में उल्लेख है। इसके अलावा नई दिल्ली, चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान की कंपनियों की भरमार है। ऐसी कंपनियों के निदेशकों के नाम भी सार्वजनिक किए गए हैं।

किस राज्य की कितनी कंपनियां हैं सूची में शामिल

राज्य रियल एस्टेट कंपनियां

दिल्ली 183

हरियाणा 143

राजस्थान 83

पंजाब 75

उत्तर प्रदेश 69

उत्तराखंड 40

हिमाचल 20

मध्य प्रदेश 15

तमिलनाडु 7

केरल 3

हिमाचल में बेनामी थीं 750 संपत्तियां

2012 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने प्रदेश उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश डीपी सूद की अध्यक्षता में एक बेनामी संपत्ति जांच आयोग गठित किया था। इस आयोग द्वारा दी गई रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए थे। इसके तहत हिमाचल में करीब 750 बेनामी संपत्तियां थीं।