नई दिल्ली। भारतीय मूल के खगोल भौतिक वैज्ञानिक सुब्रमण्यम चंद्रशेखर ने ही नासा के टच द सन मिशन की नींव रखी थी। उन्होंने 60 साल पहले डॉ. एयुगेन नेवमैन पार्कर के शोध प्रकाशन का रास्ता साफ किया था।

1958 में पार्कर ने सोलर विंड की खोज की थी। उस समय उनकी उम्र 31 वर्ष की थी। उन्होंने कहा था कि सूर्य से लगातार चार्ज्ड पार्टिकल निकलते रहते हैं और अंतरिक्ष में घूमते रहते हैं। वैज्ञानिक समुदाय ने उनकी इस स्थापना को मानने से इन्कार कर दिया था। वैज्ञानिकों का मानना था कि अंतरिक्ष बिलकुल खाली है।

इंडियन इंस्टीट्यूट आफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आइआइएसइआर) कोलकाता के एसोसिएट प्रोफेसर दिब्येंदु नंदी ने बताया कि पार्कर ने खगोलीय जर्नल को अपना शोध सौंपा था। दो बार अलग-अलग समीक्षकों ने उसे नकार दिया था।

खगोलीय जर्नल के वरिष्ठ संपादक सुब्रमण्यन चंद्रशेखर ने समीक्षकों को नकार दिया था। उन्होंने इस रिसर्च पर काम किया और इसे प्रकाशित करने का फैसला किया। भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में काम करने के लिए 1983 में उन्हें नोबल पुरस्कार मिला था।