मुंबई। जेट एयरवेज का परिचालन अस्थायी तौर पर बंद होने से कंपनी के करीब 20,000 कर्मचारियों पर संकट के बादल गहराने लगे हैं। कंपनी ने बुधवार को सिर्फ पांच विमानों को परिचालन किया उसके बाद पैसा नहीं होने से गुरुवार से सभी उड़ानें बंद करने का फैसला ले लिया गया। फिलहाल जेट एयरवेज को 8,000 करोड़ रुपये का कर्ज, कर्मचारियों का तीन महीने से ज्यादा का वेतन, विमान पट्टेदारों का बकाया और रद हुई उड़ानों के एवज में यात्रियों का करोड़ों रुपये का रिफंड का भुगतान करना है।

सरकार ने बुधवार को स्पष्ट कर दिया है कि वह जेट एयरवेज के संकट का निवारण मौजूदा रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क के तहत करेगी। लेकिन साथ ही यह भी कहा कि यात्रियों की समस्याओं का निवारण उसकी प्राथमिकताओं में ऊपर है। नागरिक विमानन मंत्रालय ने बुधवार को एक के बाद एक ट्वीट में कहा कि मंत्रालय के सचिव प्रदीप सिंह खरोला गुरुवार को भी एयरपोर्ट और एयरलाइंस कंपनियों के प्रतिनिधियों से बातचीत करेंगे।

इस तरह शुरू हुआ था जेट का सफर

जेट एयरवेज की स्थापना पहली अप्रैल 1992 को नरेश गोयल के पुत्र निवाण व पुत्री नम्रता गोयल की कंपनी टेलविंड्स द्वारा की गई थी। जेट ने 5 मई, 1993 को मुंबई व अहमदाबाद से एयर टैक्सी ऑपरेटर के तौर पर अपने ऑपरेशंस शुरू किए। उसके बाद12 मई, 1994 को जेट एयरवेज के सारे शेयर टेलविंड्स का ट्रांसफर कर दिए गए। टेलविंड्स में उस समय नरेश गोयल की इक्विटी 60 फीसद, जबकि गल्फ एयर और कुवैत एयर की 20-20 फीसद थी।

14 जनवरी, 1995 को जेट को शेड्यूल्ड एयरलाइन का दर्जा मिल गया। जेट की पहली अंतरराष्ट्रीय उड़ान 2004 को दिल्ली से काठमांडू के लिए हुई थी। 2005 में जेट ने अपना पहला इक्विटी इश्यू निकाला। 2007 में इसने एयर सहारा को खरीद लिया और उसका नाम जेटलाइट कर दिया। 2008 में जेटलाइट का जेट एयरवेज में विलय कर दिया गया। 2009 में जेट एयरवेज ने जेट कनेक्ट नाम से एक और लो कॉस्ट सब्सिडियरी लांच की। 2010 में कंपनी ने नंबर-वन एयरलाइन का दर्जा हासिल कर लिया और उसके बाद लो-कॉस्ट एयरलाइंस से स्पर्धा के चलते वर्ष 2012 में जेट एयरवेज दूसरे स्थान पर आ गई।

नवंबर, 2013 में कंपनी ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की एयरलाइन एतिहाद एयरवेज के हाथों 24 फीसद इक्विटी बेचने का फैसला किया। अक्टूबर, 2017 तक जेट एयरवेज देश की दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइन बनी हुई थी और इसके पास 23,000 कर्मचारियों के अलावा 124 विमानो का विशाल बेड़ा था। कंपनी देश-विदेश के 52 शहरों के लिए उड़ाने संचालित कर रही थी साथ ही वित्त वर्ष 2017-18 में जेट एयरवेज 252 अरब डॉलर के राजस्व के साथ 6.3 अरब डॉलर के लाभ में थी

ऐसे शुरू हुए बुरे दिन

तीन अगस्त, 2018 को कंपनी ने उन खबरों का खंडन किया, जिसमें कहा गया था कि कंपनी 60 दिनों से ज्यादा उड़ान नहीं भर सकती है। 11 अगस्त, 2018 को एसबीआई चेयरमैन ने कहा कि जेट एयरवेज के कर्ज को 'वॉच' लिस्ट में रखा गया है। 27 अगस्त, 2018 को कंपनी को उससे पिछली जून तिमाही में नुकसान हुआ। इस मामले में कंपनी ने कहा कि वह पूंजी निवेश करेगी और खर्च में 2,000 करोड़ रुपये की कटौती करेगी।

छह सितंबर, 2018 को कंपनी ने कहा कि उसने 84 फीसद कर्मचारियों को अगस्त का वेतन दे दिया है। पांच नवंबर, 2018 को खबरें आईं कि टाटा ग्रुप जेट एयरवेज में 51 फीसद हिस्सेदारी खरीदकर उसका विलय विस्तारा एयरलाइंस में करना चाहता है। दिसंबर में एतिहाद एयरवेज की जेट एयरवेज के कर्जदाताओं से बातचीत की खबरें आईं। इस साल जनवरी में एतिहाद ने मौजूदा हालात में जेट एयरवेज में नए निवेश से असमर्थता जताई।

फरवरी में कंपनी ने पट्टेदारों को बकाया भुगतान में विफलता के बाद चार विमानों का परिचालन रोक दिया। फरवरी में ही जेट के निदेशक बोर्ड ने समाधान प्रक्रिया को मंजूरी देते हुए कर्जदाताओं को सबसे बड़ा शेयरधारक बना दिया और समाधान शर्तों के तहत मार्च में संस्थापक नरेश गोयल और उनकी पत्नी ने कंपनी के निदेशक बोर्ड से इस्तीफा दे दिया।