श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में गुरुवार को अब तक का सबसे बड़ा आतंकी हमला हुआ। जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर अवंतीपोरा के पास गोरीपोरा में हुए हमले में सीआरपीएफ के 44 जवान शहीद हो गए। लगभग 30 जवान जख्मी हैं। इनमें से कई की हालत गंभीर है। हमले को पाकिस्तान से संचालित जैश ए मुहम्मद के आत्मघाती दस्ते अफजल गुरु स्क्वाड के स्थानीय आतंकी आदिल अहमद उर्फ वकास ने अंजाम दिया। उसने 320 किलो विस्फोटकों से लदी स्कॉर्पियो को सीआरपीएफ के काफिले में शामिल जवानों से भरी एक बस को टक्कर मारकर उड़ा दिया। काफिले में शामिल तीन अन्य वाहनों को भी भारी क्षति पहुंची है।

घायल जवानों को उपचार के लिए बादामी बाग सैन्य छावनी स्थित सेना के 92 बेस अस्पताल में दाखिल कराया गया है। आतंकी संगठन जैश ए मुहम्मद ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। हमले में शहीद सभी जवान सीआरपीएफ की 17वीं, 54वीं और 92वीं वाहिनी के थे। आतंकियों का निशाना बना वाहन सीआरपीएफ के काफिले का हिस्सा था। सुबह जम्मू से चले इस काफिले में 60 वाहन थे, जिनमें 2547 जवान थे।

दोपहर करीब सवा तीन बजे जैसे ही काफिला जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर गोरीपोरा (अवंतीपोरा) के पास पहुंचा। तभी अचानक एक कार तेजी से काफिले में घुसी और आत्मघाती कार चालक ने सीआरपीएफ की 54वीं वाहिनी की बस को टक्कर मार दी। टक्कर लगते ही धमाका हो गया। इससे बस के परखच्चे उड़ गए। धमाका इतना भयावह था कि कई मील दूर तक आवाज सुनी गई।

पल भर में हाईवे पर करीब 100 मीटर के दायरे में क्षत-विक्षत शव व शरीर के अंगों के टुकड़े पड़े हुए थे। धमाका होते ही काफिले में शामिल अन्य वाहन तुरंत रुक गए। जवानों ने पोजीशन ले ली। तभी वहां पहले से बैठे आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवानों ने तुरंत जवाबी फायर किया। इस पर आतंकी मौके से भाग निकले। इस बीच, जवानों ने पूरे इलाके को घेरते हुए विस्फोट से तबाह हुई बस में जख्मी और मृत जवानों को बाहर निकलवा कर अस्पताल पहुंचाना शुरू किया। आत्मघाती आतंकी आदिल के भी मारे जाने का दावा किया जा रहा है।

इसलिए इतनी संख्या में रवाना हुए

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि खराब मौसम के कारण लगभग एक सप्ताह से जम्मू-श्रीनगर हाईवे बंद था। दो दिनों से मौसम साफ होने के कारण गुरुवार को एक साथ इतनी संख्या में जवानों को श्रीनगर रवाना किया गया था।

इसलिए है सबसे बड़ा हमला

जम्मू-कश्मीर में इससे पहले 2001 में विधानसभा पर हुए हमले में 41 लोगों की जान चली गई थी। इसके बाद 2002 में जम्मू के कालूचक में 36 जवान शहीद हो गए थे। 2004 में काजीगुंड में आइईडी विस्फोट में बीएसएफ के 19 जवान शहीद हुए थे और उनके परिवारों के 11 सदस्यों की मौत हो गई थी। गुरुवार को हुआ हमला उड़ी में 2016 में सेना के कैंप पर हुए आतंकी हमले के बाद का सबसे बड़ा है। उड़ी हमले में 18 शहीद हुए थे। इसके बाद ही सेना ने गुलाम कश्मीर में घुस कर सर्जिकल स्ट्राइक की थी।

पुलवामा के गुंडीपोरा का रहने वाला था आदिल

बता दें कि यह बीते एक दशक के दौरान कश्मीर में अब तक का सबसे बड़ा आत्मघाती हमला है। इसे अंजाम देने वाला आत्मघाती आतंकी आदिल अहमद उर्फ वकास दक्षिण कश्मीर के गुंडीबाग, काकपोरा, पुलवामा का रहने वाला था। वह अप्रैल 2018 में ही आतंकी संगठन में सक्रिय हुआ था। वह जैश के अफजल गुरु स्क्वाड में था। 21 वर्षीय आदिल 10वीं पास था और सुरक्षाबलों ने उसे सी-श्रेणी के आतंकियों में सूचीबद्ध कर रखा था। उसके ऊपर तीन लाख का इनाम था।

ऐसे हुआ हमला

-3.00 बजे सुबह : जम्मू से श्रीनगर के लिए रवाना हुआ जवानों का काफिला -60 वाहनों में श्रीनगर जा रहे थे 2547 जवान -3.15 बजे दोपहर : जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर किया गया हमला। -श्रीनगर से 30 किमी पहले : पुलवामा जिले के लेथपोरा कस्बे के पास सीआरपीएफ जवानों की बस को बनाया निशाना -विस्फोटक से भरी कार को बस से भिड़ा दी : आतंकियों ने विस्फोटकों से लदी एक कार में को हाईवे पर सीआरपीएफ की बस से टक्कर मारी। इसके बाद कार में हुए भयावह धमाके से बस व उसके पीछे आ रहे एक वाहन के परखच्चे उड़ गए।

बड़ा सवाल

इस आतंकी हमले से पहले जैश ने आदिल का एक वीडियो जारी कर दिया था। इसमें वह कार चलाकर जाते हुए गजवा-उल-हिंद का समर्थन करते देखा गया। इसके बावजूद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क क्यों नहीं हुईं?