नई दिल्ली। आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद का सरगना मसूद अजहर वर्ष 1994 में भारत आने से पहले जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद फैलाने के लिए धन जुटाने ब्रिटेन, खाड़ी देश और अफ्रीका गया था।

इंग्लैंड में एक महीने के प्रवास के दौरान उसने 15 लाख रुपये (पाकिस्तानी करेंसी में) जुटाए थे। लेकिन शारजाह और सऊदी अरब में आतंकवाद के नाम पर वह 'बहुत कम' उगाही कर पाया था।

जैश का संस्थापक आतंकी मसूद अजहर वर्ष 2001 में संसद पर हमले, पिछले महीने पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों पर आतंकी हमले समेत भारत में कई आतंकी हमले करा चुका है। फरवरी 1994 में कश्मीर में पकड़े जाने के बाद भारतीय सुरक्षा बलों को मसूद अजहर ने तब पूछताछ के दौरान बताया था कि वह वर्ष 1992 के अक्टूबर महीने में ब्रिटेन गया था।

वह ब्रिटेन पाकिस्तानी पासपोर्ट पर अपने असली नाम से गया था जिसमें 1986 का उसका असली पता दर्ज था। हालांकि भारत वह पहली बार जनवरी, 1994 में फर्जी पुर्तगाली पासपोर्ट पर गया था और उसने जन्म से गुजराती होने का दावा किया था।

सन्‌ 1992 में अपने एक महीने के ब्रिटेन प्रवास के अलावा आतंकी अजहर कई दफा अफ्रीकी देशों और खाड़ी देशों में भी गया था। लेकिन वहां उसने महसूस किया कि 'कश्मीर के मुद्दे' पर ज्यादा समर्थन नहीं मिल रहा था।

हालांकि ब्रिटेन में अक्टूबर, 1992 के दौरान वह लंदन के साउथहॉल स्थित एक मस्जिद के मुफ्ती इस्माइल से मिला था। उसी ने अजहर के सफर का खर्च उठाया था और मदद की थी। मूल रूप से गुजरात का रहने वाला मुफ्ती इस्माइल कराची के दारुल-इफ्ता-वल-अरशद से पढ़ा था।

आतंकी मसूद अजहर ने बताया कि वह ब्रिटेन में मुफ्ती इस्माइल के साथ एक महीने रहा और बर्मिंघम, नाटिंघम, बुरलेघ, शेफ्फील्ड, डड्सबरी और लीसेस्टर की कई मस्जिदों का दौरा किया था। वहां से उसे कश्मीर में आतंकवाद फैलाने के लिए वित्तीय सहायता मिली थी।

वह वहां से 15 लाख रुपये (पाकिस्तानी करेंसी) में जुटा पाया था। इसके अलावा, जैश सरगना अजहर ब्रिटेन के एक अन्य मददगार मौलाना इस्माइल समेत कई मुस्लिम नेताओं से मिला।

मौलाना इस्माइल भी भारतीय मूल का था और मंगोलिया और अल्बानिया में मस्जिदें और मदरसे बनवाने के काम में जुटा हुआ था। 1990 के शुरुआती सालों में मसूद अजहर सऊदी अरब, अबूधाबी, शारजाह, केन्या, जाम्बिया गया था। और वहां से उसने जम्मू और कश्मीर में आतंकवाद के पोषण के लिए धन इकट्ठा किया था।

अजहर इस काम के लिए सऊदी अरब भी गया था लेकिन वहां के दो इस्लामी संगठनों ने उसे उस तरह मदद नहीं की जैसी वह चाहता था। इसमें से एक संगठन जमियत-उल-इस्लाह है, जो कि जमात-ए-इस्लामी का सहयोगी है।

आतंकी मसूद अजहर ने भारतीय जांच एजेंसियों को बताया था कि चूंकि आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन जमात के प्रति निष्ठावान था, इसलिए विनम्रता से उसने आर्थिक मदद देने से इन्कार कर दिया। उस समय अरब देश कश्मीर के मुद्दे पर आर्थिक मदद नहीं देना चाहते थे।

अबूधाबी में अजहर को पाकिस्तानी मुद्रा में तीन लाख रुपये ही मिल पाए थे। जबकि शारजाह में तीन और दूसरी बार सऊदी अरब जाने पर दो लाख रुपये मिले थे।

ध्यान रहे कि आतंकी मसूद अजहर फर्जी पुर्तगाली पासपोर्ट पर पहली बार दिल्ली जनवरी, 1994 में आया था और छह दिन बाद ही कश्मीर में पकड़ा गया था। आतंकी अजहर को तत्कालीन भारत सरकार को वर्ष 1999 में इंडियन एयरलाइंस के विमान के अपहरण के बाद भारतीय बंधकों की रिहाई के बदले छोड़ना पड़ा था।