मद्रास हाई कोर्ट ने सरकारी स्कूलों में आधार आधारित बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम शुरू करने की चुनौती देने वाली एक टीचर की याचिका को खारिज करते हुए उसे या तो खुद आधार बनवाने या फिर अपनी नौकरी छोड़ने के लिए कहा है।

गवर्नमेंट हाई स्कूल की एक टीचर आर. अंनाल ने तमिलनाडु में सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त हाई स्कूलों या हायर सेकंडरी स्कूलों में काम कर रहे टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम लागू करने को चुनौती दी थी।

जस्टिस एसएम सुब्रमण्यम ने कहा कि जहां तक सरकारी कर्मचारियों की बात है, व्यक्तिगत विवरण और पहचान इक्ठ्ठा करना, भारत के संविधान के तहत सुनिश्चित मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं माना जा सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में संविधान पीठ का निर्णय लागू नहीं होगा, क्योंकि याचिकाकर्ता एक लोक सेवक के रूप में तमिलनाडु गर्वमेंट सर्वेंट्स सर्विस रूल्स के हिसाब से काम करता है। लोक सेवकों ने नियुक्ति के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए, घोषणा की कि वे सर्विस रुल्स और तमिलनाडु सरकार द्वारा प्रशासन की बेहतरी के लिए लगाए गए अन्य शर्तों का पालन करेंगे।

कोर्ट ने कहा, 'सर्वश्रेष्ठ तकनीकी को अपनाकर किसी भी बेहतर सिस्टम पर वह व्यक्ति अस्वीकार नहीं कर सकता है, जो स्कूल में काम करने वाला शिक्षक है। अगर शिक्षक के पास आधार नंबर नहीं है, तो उसे अपना नाम रजिस्टर करना और आधार नंबर पाना चाहिए और फिर आधार आधारित बायोमैट्रिक अटेंडेंस सिस्टम के माध्यम से स्कूल अटेंड करना होगा। इसके विपरीत, रिट याचिकाकर्ता यह नहीं कह सकता है कि उसे स्कूल में उपस्थित होने के उद्देश्य से आधार नंबर पाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है। चयन याचिकाकर्ता को करना है। यदि याचिकाकर्ता एक लोक सेवक के रूप में काम जारी रखने के लिए तैयार है, तो वह सेवा शर्तों का पालन करने के लिए बाध्य है। यदि वह ऐसी प्रणाली से गुजरने के लिए तैयार नहीं है, जिसे सभी सरकार द्वारा जनहित में पेश किया जाता है, तो याचिकाकर्ता को निर्णय लेना होगा, चाहे वह सर्विस में जारी रहे या छोड़ दे। हालांकि, याचिकाकर्ता स्कूल प्रशासन के सुधार के लिए शुरू की गई इस तरह की व्यवस्था पर आपत्ति नहीं कर सकता है।'