वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को काशी के बच्चों के बीच अपना जन्मदिन मनाएंगे। वह काशी में दो दिन रहेंगे। जन्मदिन पर वह बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद भी लेंगे। बदलते बनारस की झलक लेने के लिए नगर भ्रमण भी संभव है। दो दिन पूर्व स्वच्छता पखवाड़े का शुभारंभ कर देश को बड़ा संदेश देने वाले नरेंद्र मोदी अपना 68वां जन्मदिन उस परिवार के साथ मनाएंगे, जिसे उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र के रूप में चुना है।

चलो जीते हैं

अपने दो दिवसीय प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री का अधिकतर समय उन बच्चों और युवाओं के बीच गुजरेगा जो राष्ट्र के भावी निर्माता कहे जाते हैं। वे इस दौरान अपनी आंखों में पल रहे सपनों को नई पीढ़ी की पलकों में उतारेंगे और जिंदगी के सफर की सच्चाइयों से उन्हें अवगत कराने का यत्न करेंगे।

उधर, शहर में सैकड़ों स्कूली बच्चे पीएम के जन्मदिन के अवसर पर उन्हीं पर बनी फिल्म 'चलो जीते हैं' देख रहे होंगे। उन बच्चों के लिए यह एक अविस्मरणीय लम्हा होगा, क्योंकि सामने चल रही फिल्म का नायक देश के प्रधानमंत्री के रूप में उन्हीं के शहर में मौजूद भी होगा।

लोकार्पण

362 करोड़ : शहरी विद्युत सुधार कार्य, पुरानी काशी (आइपीडीएस)।

84.61 करोड़ : 3722 मजरो में विद्युतीकरण का काम।

9.90 करोड़ : सिंगल फेज के 90 हजार मीटर लगाने का काम।

2.80 करोड़ : 33 केवी विद्युत उपकेंद्र बेटावर का निर्माण।

2.58 करोड़ : 33 केवी विद्युत उपकेंद्र कुरुसातो का निर्माण।

2.74 करोड़ : नागेपुर ग्राम पेयजल योजना।

20 करोड़ : बीएचयू में अटल इन्क्यूबेशन सेंटर।


शिलान्यास

14.10 करोड़ : बीएचयू में वैदिक विज्ञान केंद्र की स्थापना

34 करोड़ : रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ आफ्थेल्मोलाजी।

23.08 करोड़ : 132 केवी विद्युत उपकेंद्र चोलापुर का निर्माण।


रोजगार

98 लाख : कुंभकारी उद्योग के तहत 260 विद्युत चालित चाक, आधुनिक भट्ठी।

53.25 लाख : हनी मिशन के तहत 500 मधुमक्खी बाक्स।

7.50 लाख : खादी व सोलर वस्त्र के अंतर्गत 3 रेडीबार्प मशीन।


बच्चों से मन की बात

काशी प्रवास के पहले दिन 17 सितंबर की शाम जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर नरउर गांव के सरकारी स्कूल में जाकर वहां के 200 बच्चों के बीच अपना जन्मदिन मनाते हुए पीएम उनसे संवाद भी करेंगे।

यह आयोजन कई लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। एक ओर जहां वे बच्चों से अपने मन की बात साझा कर रहे होंगे तो वहीं बच्चे भी बिना रोकटोक से अपने मन की बात कहेंगे।

संवाद के लिए सरकारी स्कूल को चुन कर उन्होंने सरकारी मशीनरी को भी एक मौन संदेश दिया है कि उपेक्षा के शिकार इन विद्यालयों के लिए वे न सिर्फ संवेदनशील हैं बल्कि इनकी बेहतरी के लिए दृढ़ संकल्पित भी हैं।