Naidunia
    Saturday, February 24, 2018
    PreviousNext

    पीएनबी घोटाला: आंकने में नाकाम रही सीबीआई

    Published: Thu, 15 Feb 2018 11:54 PM (IST) | Updated: Thu, 15 Feb 2018 11:55 PM (IST)
    By: Editorial Team
    pnb scam cbi 15 02 2018

    नई दिल्ली। सीबीआई की एफआईआर के दो हफ्ते बाद 11 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के घोटाले सामने आने से देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी की कार्य प्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। सीबीआई ने नीरव मोदी और दूसरे आरोपियों के ठिकानों पर दनादन छापा मारा। उसके खिलाफ लुक आउट नोटिस भी जारी कराया। लेकिन, वह घोटाले की गंभीरता को आंकने में विफल रही। शायद यही कारण है कि सरकार को छुट्टी के दिन ईडी को सक्रिय करना पड़ा।

    दरअसल, पीएनबी ने 29 जनवरी को ही नीरव मोदी, मेहुल चौकसी और उनकी कंपनियों द्वारा लेटर ऑफ अंडरस्टैंडिंग की आड़ में घोटाले की शिकायत की थी। इस पर सीबीआई ने 31 जनवरी को आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। इसके दो दिन बाद तीन और चार फरवरी को आरोपियों के 21 ठिकानों पर छापेमारी की गई। नीरव मोदी और तीन दूसरे आरोपियों के खिलाफ चार फरवरी को लुक आउट नोटिस भी जारी करा दिया गया।

    लेकिन, सीबीआई के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं है कि छापे में उसे नीरव मोदी और मेहुल चौकसी के 11,400 करोड़ रुपये के घोटाले की भनक क्यों नहीं लगी? पीएनबी और आरोपियों के ठिकानों से सात दर्जन से अधिक दस्तावेज भी बरामद किए गए थे। अब सीबीआई सफाई देती फिर रही है कि उसकी जांच केवल 280 करोड़ रुपये के घोटाले की शिकायत से जुड़े दस्तावेज जब्त करने तक सीमित थी।

    शायद यही कारण है कि सरकार ने देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी के बजाय आरोपियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई के लिए ईडी पर भरोसा किया। छुट्टी के दिन भी ईडी का दफ्तर खुलवाकर मनी लांड्रिंग का केस दर्ज किया गया। एक दिन की सक्रियता से ही घोटाले की आधी रकम बरामद भी कर ली गई। सीबीआई की यही हालत विजय माल्या के खिलाफ जांच के दौरान भी हुई थी। जब लंबे जांच के बावजूद सीबीआई माल्या के खिलाफ कार्रवाई करने और उसे देश छोड़कर भागने से रोकने में बुरी तरह विफल रही थी।

    प्रतिक्रिया दें
    English Hindi Characters remaining


    या निम्न जानकारी पूर्ण करें
    नाम*
    ईमेल*
    Word Verification:*
    Please answer this simple math question.
    +=

      जरूर पढ़ें