नई दिल्ली। राष्ट्रीय बाल सुरक्षा अधिकार आयोग (एनसीपीसीआर) ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय से निजी और गैर सहायता प्राप्त स्कूलों की फीस प्रति वर्ष 10 फीसदी से अधिक नहीं बढ़ाने की सिफारिश की है। आयोग की सदस्य प्रियंका कानूनगो ने कहा कि मंत्रालय को हमने राज्यों में जिलास्तरीय शुल्क नियामक प्राधिकरण बनाने का सुझाव दिया है। यह स्कूलों में होने वाली फीस वृद्धि पर नजर रखने का काम करेगा।

कानूनगो ने बताया कि हमें फीस बढ़ोतरी के बाद अभिभावकों और विद्यालयों के बीच हुए विवादों के बीच बच्चों के मानसिक उत्पीड़न की कई शिकायतें मिली हैं। इसके बाद ही हमने गैर सहायता प्राप्त स्कूलों के लिए एक प्रणाली तैयार की है। देश में लगभग 23 फीसदी गैर सहायता प्राप्त विद्यालय हैं, जो कुल आबादी के 36 फीसदी बच्चों की शैक्षिक जरूरतों को पूरा करते हैं।

उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में शुल्क नियामक की व्यवस्था नहीं है, उन्हें इसे अपनाना चाहिए। इसके मुताबिक, अगर स्कूल फीस वृद्धि के बताए गए नियमों की अवहेलना करता है तो अगले साल उसके प्रवेश लेने पर प्रतिबंध लगाने या फिर उस स्कूल को संचालित करने वाले पर कुल राजस्व का 10 फीसदी जुर्माना लगाया जा सकता है।