धनबाद। संयुक्त बिहार के समय दुमका में हुए चर्चित वर्दी घोटाले में गुरुवार को धनबाद सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश पीयूष कुमार ने फैसला सुनाया है। कांड के आरोपी तत्कालीन एडीशनल एसपी शिवशंकर सिंह और सप्लायर रामअवतार सिंघानिया को कोर्ट ने तीन-तीन साल कैद की सजा सुनाई है। दोनों आरोपियों को आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है।

32 साल तक मुकदमे की कार्रवाई चलने के कारण नौ आरोपियों में सात की मौत फैसले से पूर्व ही हो गई थी। फिलवक्त उक्त दोनों आरोपी ही ट्रायल फेस कर रहे थे।


ये है मामला -

14 नवंबर 1986 को सीबीआइ ने वर्दी घोटाले के मामले का पर्दाफाश करते हुए प्राथमिकी दर्ज की थी। प्राथमिकी में सीबीआइ ने आरोप लगाया था कि नौ जून 1982 से 25 मई 1984 के दौरान तत्कालीन दुमका एसपी विशन सिंह जयंत सहित अन्य अधिकारियों ने सप्लायरों के साथ मिलीभगत कर वर्दी, गार्डन रबर, पाइप, फाइबर ग्लास हेलमेट, प्रिजनरोप, एस. चेयर इत्यादि की खरीदारी में गड़बड़ी की थी।

इसमें से कुछ सामान खरीदे ही नहीं गए थे और उनकी राशि उठा ली गई थी। जिनकी खरीदारी हुई थी, उनकी कीमत अधिक वसूली गई थी। इससे बिहार सरकार को 1,21,977 रुपये का चूना लगा था। सीबीआइ ने रिटायर्ड एडीजी विशन सिंह जयंत, तत्कालीन एडीशनल एसपी शिव शंकर सिंह, स्टैंडर्ड सप्लाई एजेंसी के प्रोपराइटर राम अवतार सिंघानिया, रवींद्र कुमार समेत अन्य के विरुद्ध आरोपपत्र दायर किया था।

14 मई 2009 को आरोप तय किए जाने के बाद सुनवाई शुरू हुई थी। फिलवक्त इस मामले में शिव शंकर सिंह व रामअवतार सिंघानिया ट्रायल फेस कर रहे थे। शेष आरोपियों की मौत हो जाने के कारण उनके विरुद्ध सुनवाई समाप्त कर दी गई थी।


इन आरोपियों की हो चुकी मौत -

1 -विशन सिंह जयंत

2- राजदेव राय

3- रवींद्र कुमार

4- सिद्धू विरूली,

5- योगेश्वर झा

6- तेजनाथ अग्रवाल

7- महावीर प्रसाद जैन