गुवाहाटी। असम पुलिस ने हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी कमर-उज-जमा के साथ कथित संबंधों के मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। इनसे पूछताछ की जा रही है।

कुछ दिनों पहले राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) से मिली सूचना पर उत्तर प्रदेश के आतंकवाद निरोधी दस्ते ने जमा को कानपुर से गिरफ्तार किया था। वह गणेश चतुर्थी के मौके पर एक मंदिर पर हमले की योजना बना रहा था। एटीएस का एक दल तीनों से पूछताछ के लिए जल्द ही असम पहुंचने वाला है।

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(गिरफ्तार हिजबुल मुजाहिदीन आतंकी कमर-उज-जमा)

असम के पुलिस महानिदेशक कुलाधार सैकिया ने बताया कि तीनों की शिनाख्त शहनवाज आलम, सैदुल आलम और उमर फारुक के तौर पर हुई है। इन्हें क्रमश: असम-मेघालय सीमा से लगने वाले होजाई, उदाली और बैरनीहाट इलाके से पकड़ा गया है।

सैकिया ने बताया कि ये तीनों जमा के साथ नियमित संपर्क में थे। अब हम यह जानना का प्रयास कर रहे हैं कि इन लोगों उसे कौन सी सूचना दी है। इसके साथ ही साल के शुरुआत में जमा के असम आने और यहां वह कहां-कहां गया था, इसका भी पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं।

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(गिरफ्तार उमर फारुक)

आरोप है कि शाहनवाज ने ही फर्जी आइडी पर जमा को मोबाइल सिम उपलब्ध कराया था जबकि सैदुल आतंकी जमा का जिगरी दोस्त हैं और वह कश्मीर में उसके साथ रह चुका है। जबकि उमर पर आरोप है कि जब जमा असम आया था तो उसके पास ही ठहरा था।

असम में पहली बार दो उग्रवादियों को मौत की सजा

एनआइए अदालत ने एनडीएफबी (एस) के दो उग्रवादियों को मौत की सजा सुनाई है। जबकि इसी संगठन के दो अन्य को उम्रकैद की सजा दी गई है। असम के सोनितपुर जिले में चार वर्ष पहले छह लोगों की हत्या के मामले में यह सजा सुनाई गई है। असम में किसी उग्रवादी को मौत की सजा सुनाने की यह पहली घटना है।

एनआइए के विशेष न्यायाधीश महमूद अहमद ने शनिवार को इस मामले को दुर्लभ करार दिया और बिष्णु नारजारे तथा अजय बासुमातारी को मौत की सजा सुनाई। जबकि संजू बारदोलोई नितुल डैमरी को आजीवन कैद की सजा सुनाई।