लखनऊ। 'अतिथि देवो भव' हमारी परंपरा है और 'पहले आप' लखनऊ की तहजीब। 21-22 फरवरी को नवाबों के इस शहर में आयोजित 'इन्वेस्टर्स समिट' के दौरान यह परंपरा निभाई जाएगी और तहजीब भी। दोनों दिन की शुरुआत समिट में भाग ले रहे 'पार्टनर कंट्री' के सत्रों से होगी। उद्घाटन सत्र में भी इसका ख्याल रखा गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में मुकेश अंबानी, गौतम अडानी, कुमार मंगलम बिड़ला, बाबा रामदेव, आनंद महिद्रा, फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज (फिक्की) के अध्यक्ष रमेश शाह और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआइआइ) की पहली महिला अध्यक्ष शोभना कामिनेनी के साथ मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री अनिरुद्ध जगन्नाथ भी शामिल हैं।

फिनलैंड के सत्र से होगी पहले दिन की शुरुआत-

21 फरवरी को उद्घाटन के बाद पहला सत्र फिनलैंड का होगा। इसमें औद्योगिक विकास राज्य मंत्री सुरेश राणा और ग्रेटर नोएडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीइओ) देवाशीष पांडा विशेष रूप से मौजूद रहेंगे। इसी दिन जापान के सत्र में नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना और प्रमुख सचिव सुधीर बोबडे मौजूद रहेंगे।

22 फरवरी के सत्र की शुरुआत चेक रिपब्लिक के सत्र से होगी। इसमें उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और यमुना एक्सप्रेस वे अथारिटी (यीडा) के सीइओ अरुण वीर सिंह भाग लेंगे। थाइलैंड के सत्र में सीइओ नोएडा आलोक टंडन, स्लोवाक के सत्र में ग्रेटर नोएडा के सीइओ देवाशीष पांडा और मारीशस के सत्र में मंत्री सुरेश राणा और यीडा के अरुण वीर सिंह मौजूद रहेंगे।

दूसरे दिन के सत्रों में मेहमान देशों को अच्छा खासा समय भी दिया गया। ये सत्र दोनों दिन के उन कुछ खास सत्रों में होंगे जो ढाई घंटे के हैं। अमूमन सत्रों का समय डेढ़ से दो घंटे ही है।

ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के लिए भी माहौल-

लखनऊ के बाद सरकार 'ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट' की भी तैयारी कर रही है। यह साल के अंत में या अगले साल के शुरुआत में हो सकता है। भाजपा सरकार बनने के बाद से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रतिबद्धता के नाते कई विदेशी देशों ने उत्तर प्रदेश में निवेश की रुचि दिखाई है।

इस क्रम में जापान, कोरिया, थाईलैंड, इसराइल, नीदरलैंड और अमेरिका आदि देशों के राजदूत/उच्चायुक्त और कंपनियों के प्रतिनिधिमंडल योगी से मिल चुके हैं। हर मुलाकात में मुख्यमंत्री ने संबंधित देश की विशेषज्ञता के अनुसार सहयोग भी मांगा।

खासकर स्वास्थ्य, शिक्षा, चिकित्सा, कृषि एवं संबंधित क्षेत्र, बुनियादी संरचना और पर्यावरण आदि के लिए। यहां के 'इन्वेस्टर्स समिट' में भी मेहमान देशों के साथ विदेशी निवेशक भी आ रहे हैं।