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    देशी कंपनियों को सहारा देने के लिए जब विदेशियों को कहा 'ना'

    Published: Fri, 08 Dec 2017 09:29 AM (IST) | Updated: Fri, 08 Dec 2017 09:41 AM (IST)
    By: Editorial Team
    morarji desai lever brothers 08 12 2017

    इन दिनों देश में स्वदेशी कंपनियों द्वारा उत्पादित सामान के लिए समर्थन का माहौल है। लोग विदेशी कंपनियों के बजाय देशी कंपनियों के उत्पाद को तवज्जो दे रहे हैं। ऐसा ही माहौल तब भी बना था, जब आजादी के ठीक बाद देश आर्थिक रूप से कमजोर था।

    एक समय तो ऐसा भी आया जब सरकार में बैठे ताकतवर मंत्री ने देशी कंपनियों को प्रोत्साहन देने के लिए करोड़ों रुपए का निवेश लेकर दरवाजे पर खड़े विदेशी कंपनियों के प्रतिनिधियों को लौटा दिया था। किस्सा सन्‌ 1957 का है। तब मोरारजी देसाई केंद्र सरकार में वाणिज्य व उद्योग मंत्री थे। उन पर देश में तेजी से उद्योगों का जाल फैलाने और देश की अर्थव्यवस्था को गति देने की जिम्मेदारी थी।

    भारत में तब साबुन बनाने वाली कंपनियों में विदेशी कंपनी लीवर ब्रदर्स का दबदबा था। वह कुल खपत का 50 फीसदी साबुन बनाती थी। इसी कंपनी के प्रबंधन ने भारत में अपने विस्तार के लिए मोरारजी से मुलाकात की। मगर मोरारजी ने इस तर्क के साथ साफ मना कर दिया कि इससे 'देशी कंपनियां दबाव में जा जाएंगी'।

    इसी तरह सिलाई मशीन बनाने वाली विदेशी कंपनी 'सिंगर' को भी प्लांट स्थापित करने से मना कर दिया गया क्योंकि तब तक देशी कंपनियां पर्याप्त संख्या में सिलाई मशीन बनाने लगी थीं। मोरारजी के इन कठोर निर्णयों ने देशी कंपनियों को फलने-फूलने का मौका दिया। इससे देश का पैसा देश में ही रहा और उद्योगों ने तरक्की की।

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