Menu

ये 10 फिल्में भारत में हुई थीं बैन, लेकिन विदेश में मिली खूब तारीफ

   |  Sat, 06 Jan 2018 04:03 PM (IST)

कुछ बॉलीवुड फिल्में ऐसी भी होती हैं जो बनाई तो जरूर जाती हैं लेकिन उसके कंटेंट की वजह से उन्हें रिलीज नहीं किया जा सकता। ऐसी बहुत सी फिल्में हैं जो अपने बोल्ड कंटेंट के कारण भारत में रिलीज नहीं हो पाई लेकिन विदेशों में इन्हें खूब सराहा गया। यहां देखिए ऐसी फिल्मों की लिस्ट :

पांच: अनुराग कश्यप की यह फिल्म जोशी-अभ्यंकर के सीरियल मर्डर पर आधारित थी। लेकिन सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म को इसलिए बैन कर दिया क्योंकि इसमें हिंसा, अश्लील भाषा और ड्रग्स की लत को दिखाया गया था।

ब्लैक फ्राइडे: 2004 में हुसैन जैदी की किताब पर बनी यह फिल्म अनुराग कश्यप की दूसरी फिल्म थी जिसे सेंसर बोर्ड ने बैन कर दिया। ये 1993 मुंबई बम ब्लास्ट पर आधारित थी। उस समय बम ब्लास्ट का केस, कोर्ट में चल रहा था इसीलिए हाई कोर्ट ने पर स्टे लगा दिया।

परजानिया: 2005 की यह फिल्म गुजरात दंगों पर आधारित थी। कहानी में अजहर नाम का लड़का 2002 दंगों के समय गायब हो जाता है। वैसे तो परजानिया को राष्ट्रीय अवार्ड मिला है लेकिन गुजरात दंगों जैसे संवेदनशील विषय के कारण फिल्म गुजरात में बैन कर दी गई थी।

इंशाअल्लाह फुटबॉल: 2010 की ये डाक्यूमेंट्री एक कश्मीरी लड़के पर बनी है जो विदेश जाकर फुटबॉल खेलना चाहता है। उसका पिता आतंकवादी गतिविधियों से जुड़ा था इसलिए उसे जाने की अनुमति नहीं मिली। कश्मीर का मसला हमेशा से ही संवेदनशील रहा है जिसकी वजह से सेंसर बोर्ड ने रिलीज की मंजूरी नहीं दी।

उर्फ प्रोफेसर: साल 2000 की निखिल आडवाणी की इस फिल्म में मनोज पाहवा, अंतरा माली और शरमन जोशी जैसे सितारे थे। लेकिन अश्लील दृश्य और भाषा होने के कारण सेंसर बोर्ड ने इसे पास नहीं किया।

अनफ्रीडम: राज अमित कुमार द्वारा निर्देशित फिल्म में एक समलैंगिक लड़की अपने बाइसेक्सुअल लवर को किडनैप कर लेती है। सेंसर बोर्ड ने कुछ कट्स सुझाए थे, जिन्हें निर्देशक ने हटाने से मना कर दिया तो फिल्म पर पूरी तरह से बैन लगा दिया।

फायर: दीपा मेहता की इस फिल्म में हिंदू परिवार की दो महिलाओं को लेस्बियन बताया गया है। फिल्म का शिवसेना समेत कई हिंदू संगठनों ने काफी विरोध किया था। विवाद के बाद आखिरकार सेंसर ने इसे बैन कर दिया।

वॉटर: दीपा मेहता की दूसरी फिल्म जो विवादों में उलझी थी। वाराणसी में शूटिंग के दौरान हिंदू संगठनों ने इसका विरोध किया था। साल 2000 में यूपी सरकार ने फिल्म की शूटिंग रोकने का फैसला लिया। बाद में इसे श्रीलंका में शूट किया। 2007 में भारत में जाकर रिलीज हुई।

लिपस्टिक अंडर माई बुर्का: फिल्म पर असंस्कारी होने का ठप्पा लगा और सर्टिफिकेट देने से पहले इनकार कर दिया गया। इसकी वजह बताते हुए सेंसर बोर्ड ने कहा था कि यह कुछ ज्यादा ही महिला केंद्रित है। फिल्म के यौन दृश्यों और भाषा पर भी बोर्ड ने आपत्ति जताई है।

चतरक : साल 2012 की बंगाली फिल्म भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज नहीं हो सकी क्योंकि इसमें कई कामुक सीन थे। फिल्म में ग्राफिक सेक्स सीन थे जिसमें पाओली ने न्यूड पोज किया था। ये सीन ऑनलाइन भी लीक हो गया था। इस फिल्म को विदेश में काफी सराहा गया।