17 साल में बना था राष्ट्रपति भवन, जानिए अन्य रोचक FACTS

hiten j   |  Wed, 10 Jan 2018 10:32 AM (IST)

राष्ट्रपति भवन भारत के राष्ट्रपति का सरकारी निवास स्थान है और 1950 तक इसे वायसराय हाउस ही कहते थे। यह तब बनी थी जब भारत की राजधानी कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित की गई। आइए जानते हैं राष्ट्रपति भवन से जुड़े ऐसे ही रोचक तथ्य -

तुर्की और ऑस्ट्रिया के बाद भारत का राष्ट्रपति भवन विश्व का तीसरा सबसे बड़ा सरकारी निवास स्थान है।

राष्ट्रपति भवन के निर्माण में 70 करोड़ से ज्यादा ईंटें और 35 लाख घन फीट से ज्यादा पत्थर लगा है, जिसके साथ लोहे का इस्तेमाल न के बराबर हुआ है। इसके निर्माण में 29 हजार लोगों ने अथक परिश्रम किया।

राष्ट्रपति भवन को बनाने में 17 साल लगे थे। राष्ट्रपति भवन का निर्माण कार्य 1912 में शुरू किया गया था और 1929 में पूरा किया गया। इसके लिए लगभग 300 परिवारों को अन्य जगह स्थानांतरित किया गया।

इस महल में 340 कमरे हैं। वर्तमान में भारत के राष्ट्रपति उन कक्षों में नहीं रहते, जहां वायसराय रहते थे। बल्कि वे अतिथि कक्ष में रहते हैं।

राष्ट्रपति भवन प्रागंण में एक ड्राइंग रूम, खाने का एक कमरा, एक बैंक्वेट हॉल, एक टेनिस कोर्ट, एक पोलो ग्राउंड, क्रिकेट का एक मैदान और एक संग्रहालय भी है। साथ ही साथ यहां बच्चों के लिए दो गैलरीज भी हैं।

राष्ट्रपति भवन परिसर में ही मुगल व ब्रिटिश शैली के अनूठे मिश्रण से बना मुगल गार्डन है, जो तकरीबन 13 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां फूलों की कुछ विदेशी किस्में भी शामिल हैं। मुगल गार्डन हर साल जनता के लिए फरवरी-मार्च के बीच खुलता है।

ब्रिटिश वास्तुकार सर एडविन लैंडसियर लुटियंस को इसके निर्माण का जिम्मा सौंपा गया था, जिन्होंने ब्रिटेन में भी वायसराय हाउस का निर्माण करवाया था। राष्ट्रपति भवन के निर्माण कार्य के दौरान वे दोनों देशों के बीच लगातार 20 सालों तक आते-जाते रहे।

राष्ट्रपति भवन भारत के राष्ट्रपति का सरकारी निवास स्थान है और 1950 तक इसे वायसराय हाउस ही कहते थे। यह तब बनी थी जब भारत की राजधानी कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित की गई।