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नीरव मोदी से तेलगी तक: ये हैं देश के बड़े घोटाले

   |  Wed, 14 Feb 2018 07:03 PM (IST)

आजादी से लेकर आज तक कई बड़े घोटाले लोगों के सामने आए, जिससे देश को हजारों करोड़ के नुकसान का सामना करना पड़ा। आज हम आपको कुछ ऐसे ही घोटालों के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया था।

पीएनबी फ्रॉड केस- सीबीआई ने अरबपति ज्वेलरी डिजायनर नीरव मोदी और उनके साझेदार मेहुल चौकसी के पासपोर्ट रद्द करने की मांग की है। वे दोनों पंजाब नेशनल बैंक द्वारा जारी 150 गारंटी पत्रों के जरिए 11400 करोड़ रुपये से अधिक के कथित फर्जी लेनदेन में मुख्य आरोपी हैं।

हर्षद मेहता घोटाला- साल 1990 से 92 का समय बड़े बदलाव का वक्त था जिसमें देश ने उदारवादी इकोनॉमी की तरफ चलना शुरू ही किया था तब मेहता ने धोखाधाड़ी से बैंको का पैसा स्टॉक मार्केट में निवेश कर दिया जिससे स्टॉक मार्केट को करीब 5000 करोड़ रुपए का घाटा हुआ।

केतन पारेख स्कैम- स्टॉक ब्रोकर केतन पारीख ने स्टॉक मार्केट में 1,15,000 करोड़ रुपए का घोटाला किया था। कहा जाता है कि हर्षद मेहता, केतन पारेख के मेंटर थे। उसी की तर्ज पर साल 2001 तक केतन पारेख देश का सफल ब्रोकर बन गया था।

अगस्ता हेलिकॉप्टर घोटाला- अगस्ता वेस्टलैंड से भारत को 36 अरब रुपए के सौदे के तहत 12 हेलिकॉप्टर ख़रीदने थे। इसमें कई भारतीय राजनेताओं एवं सैन्य अधिकारियों पर आगस्ता वेस्टलैण्ड से मोटी घूस लेने का आरोप है। इस करार में 360 करोड़ रुपये के कमीशन के भुगतान का आरोप लगा।

चारा घोटाला- बिहार में हुए इस घोटाले में लगभग 900 करोड़ के गबन की बात सामने आई थी। जिसमें लालू प्रसाद यादव, जगन्नाथ मिश्र समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया था। इस मामले में सीबीआई ने कई केस भी दर्ज किए थे। जिसमें से कुछ फैसलों में लालू प्रसाद यादव को दोषी ठहराया गया है। हालांकि अभी भी कई केस में फैसला आना बाकी है।

कोल ब्लाक आवंटन घोटाला- कैग द्वारा 2012 में अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट में सरकार पर आरोप लगाया गया कि 2004 से 2009 तक की अवधि में कोयला ब्लॉक का आवंटन गलत तरीके से किया गया। बाद में सीबीआई की जांच में भी इस बात की पुष्टि हुई।

टू जी स्पैक्ट्रम स्कैम- टेलिकॉम इंडस्ट्री के लिए आवंटित हुए 2जी स्पैक्ट्रम के नीलामी में भारी गड़बडी की बात सामने आई थी। इस घोटाले की लपेट में कई बड़ी राजनीतिक हस्तियों के साथ सरकारी अफसर भी लिप्‍त थे। कैग ने इस घोटाले में भी सरकार को अरबों रुपए के नुकसान होने की आशंका जताई थी।

स्टांप पेपर घोटाला- कई हजार करोड़ रुपए के स्टांप पेपर घोटाले की शुरुआत 90 के दशक में शुरू हुई थी। इस घोटाले का मास्टरमाइंड अब्दुल करीम तेलगी ने पहले तो स्टांप पेपर बेचने का लाइसेंस लिया फिर नकली स्टांप पेपर छापने लगा। 2006 में कोर्ट ने तेलगी पर 30 साल की सजा के साथ 202 करोड़ का जुर्माना भी लगाया था। हालांकि पिछले साल उसकी मौत हो चुकी है।

बोफ़ोर्स घोटाला- वर्ष 1987 में सामने आए इस घोटाले में आरोप लगे कि स्वीडन की तोप बनाने वाली कंपनी बोफ़ोर्स ने कमीशन के बतौर 64 करोड़ रुपए कई कांग्रेसी नेताओं को दिए थे ताकि वो भारतीय सेना को अपनी 155 एमएम हॉविट्ज़र तोपें बेच सके। इस डील में बिचौलिए इटली के व्‍यापारी ओतावियो क्वात्रोची को मुख्य आरोपी बनाया गया था।

कॉमनवेल्थ गेम घोटाला- भारत में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम के दौरान खरीद-फरोख्त और टेंडर को जारी करने में बड़ा घोटाला सामने आया था। इसमें खरीदे गए सामान का दाम कई गुना बढ़ाकर सरकार से पेमेंट का भुगतान कराया गया था। जांच एजेंसियों द्वारा इसके लिए आयोजन समिति को जिम्मेदार बताया गया जिसका केस आज तक चल रहा है।

शारदा चिटफंड घोटाला- देश के इस बड़े आर्थिक घोटाले के तार कई राज्यों में फैले हुए हैं। इस घोटाले की जांच अब तक जारी है। पश्चिम बंगाल से सामने आए इस घोटाले में तृणमूल कांग्रेस के कई बड़े नेताओं के साथ अन्य भी कई हाई प्रोफाइल लोगों के जुड़े होने की बात सामने आई। इस मामले की जांच पश्चिम बंगाल पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय कर रही है।

कारगिल ताबूत घोटाला- 1999 में हुए कारगिल युद्ध के बाद बातें सामने आईं कि युद्ध में शहीद हुए सैनिकों के शव के लिए जिन ताबूतों की खरीद हुई उसमें भारी घोटाला हुआ। कुछ सैन्य अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। कांग्रेस ने तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडीस पर घोटाले का आरोप लगाया था। बाद में उन्हें क्लीन चिट दे दी गई थी।

कॉमनवेल्थ गेम घोटाला- भारत में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम के दौरान खरीद-फरोख्त और टेंडर को जारी करने में बड़ा घोटाला सामने आया था। इसमें खरीदे गए सामान का दाम कई गुना बढ़ाकर सरकार से पेमेंट का भुगतान कराया गया था। जांच एजेंसियों द्वारा इसके लिए आयोजन समिति को जिम्मेदार बताया गया जिसका केस आज तक चल रहा है।

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