12 साल के लंबे इंतजार के बाद पाकिस्तान से भारत आईं 101 साल की महिला को आखिरकार शुक्रवार को यहां की नागरिकता मिल गई। जिला प्रशासन ने जमुना माई को भारत की नागरिकता देते हुए दावा किया है कि भारत की नागरिकता हासिल करने वाली वह देश की सबसे बुजुर्ग महिला हैं।

जोधपुर में एक छोटे से गांव सोधा री धाणी में 12 साल पहले जमुना माई अपने परिवार के साथ आकर बसी थी। माई का जन्म 1918 में अविभाजित भारत के पंजाब प्रांत में हुआ था। लंबे समय तक, उनके परिवार की आजीविका का एकमात्र स्रोत पाकिस्तान में पंजाब प्रांत के रहीम यार खान जिले में जमींदार की जमीन पर खेती करना था। दशकों तक, उनके परिवार को शोषण का सामना करना पड़ा जिस तरह से भूमिहीन मजदूर आमतौर पर गुजरते हैं - लंबे समय तक काम करने के घंटे, कम मजदूरी और कोई छुट्टियां नहीं।

1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद इनकी स्थिति और बदतर हो गई। अयोध्या में बाबकी मस्जिद के विध्वंस के बाद उनके परिवार का मुस्लिम जमींदारों और पड़ोसियों के साथ रातोंरात संबंध बदल गए और पाकिस्तान में हिंदू परिवार का रहना मुश्किल हो गया। इसके बाद साल 2000 में उन्होंने पाकिस्तान छोड़ने का फैसला किया और अगस्त 2006 में 15 सदस्यों का यह परिवार धार्मिक वीजा पर भारत आया था।

भारत आने के बाद भी, माई के परिवार की परेशानियां खत्म नहीं हुई। अपने समुदाय, मेघवालों द्वारा स्वीकार किए जाने की उनकी उम्मीद केवल एक सपना साबित हुई। उन्हें पलायन के बाद शुरुआती वर्षों में काम या आवास से वंचित कर दिया गया था।

भारत में कानून प्रवर्तन एजेंसियां भी उनके लिए कभी न खत्म होने वाले प्रश्न थे। वास्तव में, एक समय में उन्होंने पाकिस्तान वापस जाने पर भी विचार किया था।

माई को अब अपने परिवार को भारतीय नागरिकता मिलने की उम्मीद है। हालांकि जब उनकी भारतीय नागरिकता स्पष्ट हो गई और शुक्रवार को उन्हें यह नागरिकता दे दी गई तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था। खुशी में वह अपने बेटों के साथ झूमी और मिठाई भी बांटी।