जयपुर। जयपुर में दो दिन पहले पकडे़ गए छह वेतनभोगी चोरों से पूछताछ में सामने आया है कि इनकी कोई अपराधिक पृष्ठभूमि नहीं है और वेतन या कमीशन पर काम इसलिए करते है कि चुराई गई चीज बेचने के लिए परेशान नहीं होना पड़ता। अपने बाॅस को चुराई गई चीज देते हैं और वो इसे ग्रे मार्केट में बेच देता है।

जयपुर पुलिस ने दो दिन पहले छह ऐसे चोर पकड़े थे जो मोबाइल, लैपटाॅप, चेन और अन्य सामान चुराते थे और इनके बदले उनका बाॅस उन्हें 15 हजार रुपए महीना वेतन देता था। पुलिस ने मामले की जांच और पूछताछ की तो सामने आया कि ये नए चोर है। इनका कोई अपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, इसलिए पुलिस की पकड़ से बच जाते है।

इसके अलावा काम सीखने को मिलता है और सामान बेचने की दिक्कत नहीं होती। इसलिए इन्होंने अपने बाॅस आशीष के लिए वेतन पर काम करना शुरू कर दिया। आशीष इनके चुराए सामान को राजस्थान के भरतपुर, धौलपुर जैसे स्थानों पर बेच देता था।

पुलिस का कहना है कि यह नया ट्रेंड है और नए लड़के इस काम में आ रहे है। पुलिस भी अब अपनी जांच में इस नए एंगल को शामिल कर रही है।