जयपुर। ओबीसी में अलग से पांच फीसद आरक्षण की मांग कर रहे गुर्जरों को खुश करने के लिए वसुंधरा राजे सरकार ने ओबीसी से अलग एक प्रतिशत आरक्षण देने की योजना बनाई है।

इसको लेकर अगले महीने तक अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। इसके लिए विधि विशेषज्ञों की राय ली जा रही है। मंत्रिमंडलीय उपसमिति के साथ अगले सप्ताह होने वाली गुर्जर नेताओं की बैठक के बाद नए प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जाएगा।

गुर्जर समाज को शेष आरक्षण ओबीसी कोटे से पहले की तरह मिलता रहेगा। गुर्जर आरक्षण मामले से जुड़े राज्य के एक कैबिनेट मंत्री का कहना है कि हमारा पहला मकसद गुर्जरों को तत्काल राहत देकर इसे चुनाव में भुनाना है, अन्य जातियों को नाराज नहीं कर सकते हैं।

इसलिए उठाया कदम : गुजरात में पाटीदार समाज की नाराजगी का असर विधानसभा चुनाव में होता देख, वसुंधरा सरकार राजस्थान में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव में गुर्जर समाज की नाराजगी का नुकसान नहीं उठाना चाहती, इसलिए यह कदम उठा रही है।

अब तक मिल रहा आरक्षण : बता दें कि राजस्थान में वर्तमान में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 21 फीसद, अनुसूचित जाति (एसटी) को 16 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति (एसटी) को 12 फीसद आरक्षण मिल रहा है। इस प्रकार कुल आरक्षण की सीमा 49 प्रतिशत होती है।

वर्तमान में ओबीसी को मिल रहे 21 प्रतिशत आरक्षण में गुर्जर भी शामिल है, लेकिन वे अलग से पांच फीसदी आरक्षण मांग रहे हैं। अब सरकार गुर्जरों को एक फीसद अलग से आरक्षण देकर उन्हें खुश करने की तैयारी में है। इससे कुल आरक्षण 50 फीसद हो जाएगा, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश भी प्रभावित नहीं करेगा।

यह है सुप्रीम कोर्ट का आदेश : सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश के अनुसार 50 फीसद से अधिक आरक्षण नहीं दिया जा सकता है। सरकार गुर्जर वोट बैंक को खुश करने के लिए एक फीसद अलग से आरक्षण तो दे रही है, लेकिन ओबीसी के वर्तमान 21 प्रतिशत कोटा का वर्गीकरण करने को तैयार नहीं है। सरकार का मानना है कि यदि वर्गीकरण कर दिया गया तो ओबीसी में शामिल यादव, माली और जाट जैसी बड़ी जातियां नाराज हो सकती है।

उल्लेखनीय है कि करीब एक दशक से भी अधिक समय तक चले हिंसक गुर्जर आरक्षण आंदोलन के बाद सरकार ने पिछले विधानसभा सत्र में गुर्जर सहित रैबारी, रायका, गाड़यिा लुहार और धानका जातियों को पांच फीसद अलग से आरक्षण देने के लिए विधेयक पास करवाया था।

इसके बाद राज्य में कुल आरक्षण की सीमा 54 फीसद हो गई थी। सरकार द्वारा आरक्षण देने के कुछ दिन बाद ही नवंबर में राजस्थान हाई कोर्ट ने आरक्षण को लेकर विधानसभा में पारित विधेयक के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी।

कोर्ट का कहना था कि ओबीसी को पहले से ही 21 प्रतिशत आरक्षण मिल रहा है और अब पांच प्रतिशत अलग से देने के बाद कुल आरक्षण की सीमा 54 प्रतिशत हो जाएगी, जो सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का उल्लंघन है।