मनीष गोधा, जयपुर। राजस्थान में 29 जनवरी को हो रहा उपचुनाव इस बार कुछ बदले जातिगत समीकरणों में हो रहा है।

भाजपा के परम्परागत वोट बैंक माने जाने वाले राजपूत और गुर्जर समुदाय में विभिन्न कारणों से भाजपा के प्रति नाराजगी है। वहीं कांग्रेस का परम्परागत वोट बैंक माने जाने वाले जाट समुदाय के इस बार भाजपा के साथ जाने की बात कही जा रही है।

वंशवाद का विरोध करने वाली भाजपा ने अजमेर में वंशवाद का ही सहारा लेते हुए यहां से दिवंगत सांसद और केन्द्रीय मंत्री रहे सांवरलाल जाट के बेटे रामस्वरूप लाम्बा को टिकट दिया है।

राजसथान में किसी भी चुनाव में जातिगत समीकरण अहम भूमिका निभाते हैं और कुछ जातियां यहां दोनों पार्टियों के परम्परागत वोट बैंक के रूप में जानी जाती है।

यहां अजमेर और अलवर की लोकसभा सीट और माण्डलगढ की विधानसभा सीटों पर राजस्थान की प्रमुख जातियों राजपूत, जाट, मीण, गुर्जर, ब्राह्मण और मुसिलम का अच्छा प्रतिनिधित्व है। राजस्थान में राजपूत, गुर्जर भाजपा के परम्रागत वोट बैक माने जाते है।

अजमेर में राजपूतों और रावणा राजपूतों के करीब सवा लाख और गुर्जरों के करीब ढाई लाख वोट बताए जा रहे है। उधर अलवर में भी राजपूत और गुर्जर मिला कर करीब डेढ लाख वोट बताए जा रहे है।

इसी तरह माण्डलगढ की विधानसभा सीट पर भी गुर्जर और राजपूत मिला कर 50 हजार से ज्यादा वोट बताए जा रहे है। लेकिन यह दोनों ही समुदाय सरकार से नाराज चल रहे है।

राजपूतों की नाराजगी आनंदपाल एनकाउंटर प्रकरण और पद्मावती फिल्म विवाद को लेकर है, वहीं गुर्जर पांच फीसदी आरक्षण के मामले में सरकार से नाराज है। इनके नेता खुल कर अपनी नाराजगी जाहिर भी कर चुके है।

एक दूसरे का वोट बैंक अपने पक्ष में करने की कोशिश

अजमेर सीट पर दोनो दलों ने एक दूसरे के वोट बैंक को अपने पक्ष में करने की कोशिश भी की है। राजस्थान में जाटों को कांग्रेस का वोट बैंक माना जाता है, वहीं ब्राह्म्ण परम्परागत रूप से भाजपा से जुडे माने जाते है, लेकिन यहां भाजपा ने जाट उम्मीदवार को टिकट दिया है, वहीं कांगे्रस ने ब्राहम्ण को टिकट दे दिया है।

भाजपा ने तो दिवंगत सांसद सांवरलाल जाट के बेटे को टिकट देने के लिए वंशवादी राजनीति के विरोध को भी किनारे कर दिया। उधर साॅफ्ट हिन्दुत्व की राह पर चल रही कांग्रेस ने इस सीट से पहली बार रघु शर्मा के रूप में किसी ब्राह्मण को टिकट दिया है।

जानकार बताते हैं िइसका असर अलवर सीट पर भी पड सकता है, क्योकि वहां भाजपा के टिकअ के दूसरे सबसे बडे दावेदार संजय शर्मा थे जो अभी अलवर में भाजपा के जिला अध्यक्ष है। जातिगत आधार पर उम्मीदवार चयन में भी इस बार कांग्रेस ने यहां कुछ हिम्मत दिखाई है और चेहरे बदले है।

भाजपा ने जहां अजमेर में जाट की जगह जाट, अलवर में यादव की जगह यादव और माण्डलगढ में राजपूत की जगह राजपूत का मौका दिया गया है, वहीं कांग्रेस ने सिर्फ माण्डलगढ में जातिगत आधार पर उम्मीदवार रिपीट किया है, अजमेर में गुर्जर की जगह इस बार ब्राहण और अलवर में राजपूत की जगह यादव को टिकट दिया गया है।