जयपुर। राजस्थान में पुलिस महिला उत्पीड़न के करीब आधे मामलों को बोगस मान कर बंद कर रही है। राजस्थान महिला आयोग ने इसे गम्भीर मानते हुए राज्य के सभी पुलिस अधीक्षकों से बोगस मान कर बंद किए गए केसेज पर रिपोर्ट मांगी है।

राजस्थान राज्य क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के आंकडों के मुताबिक वर्ष 2015 महिलाओं के साथ बलात्कार, दहेज हत्या, अपहरण, मारपीट आदि के 29 हजार 83 केस दर्ज हुए और पुलिस ने इनमें से 13 हजार 264 मामलों को बोगस मानते हुए एफआर लगा दी।

यह आंकडा करीब 48 प्रतिशत का बनता है, यानी करीब आधे मामले बंद कर दिए गए। अन्य अपराधों जैसे डकैती, जालसाजी, चोरी, हत्या आदि के 32 प्रतिशत मामले बोगस मानते हुए बंद किए गए। महिला उत्पीड़न के मामलों में बलात्कार के मामलों में सबसे ज्यादा एफआर लगाई गई।

बलात्कार के 45 प्रतिशत से ज्यादा मामलों को बोगस माना गया है। पुलिस अधिकारी कहते हैं कि जागरूकता के कारण ऐसे मामलों की संख्या बढ रही है, लेकिन बदला लेने या अन्य कोई फायदा उठाने के लिए भी ऐसे केस बहुत दर्ज हो रहे हैं।

उधर महिला आयोग ने महिला उत्पीड़न के इतने मामलों को फर्जी माने जाने को गम्भीरता से लिया है। महिला आयोग की अध्यक्ष सुमन शर्मा ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को पत्र लिख अप्रेल तक बंद किए गए मामलों की रिपोर्ट भेजने को कहा है।

बातया जाता है कि महिला आयोग के पास इस तरह की शिकायतें आ रही है कि पुलिस दोनों पक्षों के बीच समझौता करवा कर केस बंद करवा देती है। अब महिला आयोग ऐसे केसेज की रिपोर्ट आने के बाद शिकायतकर्ताओं से यह जानकारी लेगा कि ये केस उन्होंने पुलिस के दबाव में वापस लिया या वास्तव में केस फर्जी था?